कोलकाता/लखनऊ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव न केवल राजनीतिक बल्कि देशभर के लोगों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है ।इस चुनाव के दूसरा चरण से पहले चुनाव आयोग ने 24 परगना जिले में उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को सेंट्रल आब्जर्वर के रूप में तैनात किया है,जिसके बाद बंगाल में राजनीतिक गहमा गहमी बढ़ गयी है ।

अजय पाल शर्मा के चर्चा में होने का कारण:
अजय पाल शर्मा की पहचान सख्त और प्रभावी पुलिसिंग के लिए रही है। उत्तर प्रदेश में उनके द्वारा अपराध नियंत्रण को लेकर की गई कार्रवाईयों ने उन्हें एक कड़े प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। यही वजह है कि आयोग ने उन्हें बंगाल के संवेदनशील क्षेत्र में जिम्मेदारी सौंपी है।
दूसरे चरण के मतदान की संवेदनशीलता:
दूसरे चरण में जिन 142 सीटों पर मतदान होना है, उन्हें सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। इन सीटों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है, जिनमें अजय पाल शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है पहले चरण में हुए ज़बरदस्त मतदान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।
ऐसे में चुनाव आयोग की ओर से सख्त निगरानी और अनुभवी अधिकारियों की तैनाती को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।चुनाव क्षेत्र के चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी है । बंगाल के 24 परगना जिले में टीएमसी विधायक जहांगीर खान द्वारा लगातार लोगों को डराने -धमकाने की शिकायतें मिलने के बाद आयोग ने यह नियुक्ति की है ।
चुनाव आयोग की व्यवस्था:
दूसरे चरण के मतदान से पहले चुनाव आयोग की जबरदस्त सख्ती के बीच ममता बनर्जी सहित उनके नेताओं की धमकी भरे वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। इसे ममता की राजनीतिक हताशा के रूप में ही देखा जा सकता है कि वह मंचों से खुले तौर पर धमकी दे रही है इतना ही नहीं उनके विधायक जहांगीर खान पर आरोप लग रहे हैं कि वह मतदाताओं को कल के चरण में मतदान के लिए बाहर न के लिए भी धमका रहे हैं । आब्जर्वर के रूप में यूपी के सिंघम की नियुक्ति के साथ ही टीएमसी की नेत्री सहित कार्यकर्ताओं में भी जबरदस्त खलबली देखने को मिल रही है।
चुनाव आयोग ने भी पूरी ताकत लगा रखी है कि इस चरण में भी मतदान रिकॉर्ड मात्रा में हो और पूरी तरह से निष्पक्ष हो । आयोग ने वह हर संभव उपाय लगाने का प्रयास किया है जिससे लोगों में राज्य में चल रही चुनावी प्रक्रिया को लेकर विश्वास कायम हो और वह बाहर निकले तथा मतदान करें ।
यूपी के कर्मठ आईपीएस ऑफिसर ने क्षेत्र में पहुंचते ही लोगों को केवल आश्वस्त करना शुरू कर दिया है बल्कि सोशल मीडिया पर उनके वायरल वीडियो में किसी भी प्रकार की हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त चेतावनी भरा लहजा साफ नजर आ रहा है। आईपीएस अधिकारी का यह लहजा ही टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा सिर दर्द बना हुआ है और इसी की झुंझलाहट है जो उनके राजनीतिक बयानों में साफ तौर पर दिखाई दे रही है ।
देखना होगा कि दूसरे चरण का मतदान बंगाल में कितना शांतिपूर्ण रहता है और लोग चुनाव आयोग द्वारा राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए की गई तमाम व्यवस्थाओं पर कितना भरोसा दिखाते हैं और कितनी संख्या में मतदान करने के लिए बाहर आते हैं । इस चरण का मतदान ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए भी साख और नाक की बात है क्योंकि इस क्षेत्र को ममता बनर्जी का बड़ा गढ़ माना जाता है।
टीम
बुंदेलखंड कनेक्शन
