झांसी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात दोषों से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष पहल की जा रही है।

इसी क्रम में जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित एक किशोरी को उपचार हेतु जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) झांसी से किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के लिए संदर्भित किया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं से लेकर किशोर-किशोरियों तक में पाए जाने वाले जन्मजात दोषों की पहचान मेडिकल टीमों द्वारा की जाती है। चिन्हित बच्चों को उनकी बीमारी के अनुसार नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट और हाइड्रोसिफेलस (सिर का बड़ा होना) जैसे जन्मजात दोषों का उपचार महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में किया जाता है। वहीं, जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ अथवा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ भेजा जाता है।
इसके अलावा क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट (कटे-फटे होंठ एवं तालु) तथा जन्मजात मोतियाबिंद का उपचार भी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है। क्लब फुट (टेढ़े पैर) से पीड़ित बच्चों का इलाज जिला अस्पताल झांसी में किया जाता है, जबकि जन्मजात बहरापन से ग्रसित बच्चों को उपचार के लिए कानपुर और लखनऊ भेजा जाता है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए कोक्लियर इम्प्लांट की सुविधा भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
डीईआईसी मैनेजर रामबाबू कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 12 बच्चों की सफल सर्जरी कराई गई थी। यदि किसी नवजात, बच्चे अथवा किशोर-किशोरी में जन्मजात दोष के लक्षण दिखाई देते हैं, तो परिजन कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी, झांसी में डीईआईसी मैनेजर रामबाबू कुमार से मोबाइल नंबर 7379798118 पर संपर्क कर आवश्यक जानकारी एवं सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
