झांसी। महानगर में सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जों और विवादित भूमि के क्रय-विक्रय के मामलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में अदालतों द्वारा वर्षों पहले सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई न होने से पीड़ित पक्ष में निराशा बढ़ रही है।

सदर बाजार थाना क्षेत्र के ग्राम सिमराहा निवासी एवं वर्तमान में इलाहाबाद बैंक चौराहा क्षेत्र में रहने वाले बृजेंद्र राय ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि उन्होंने वर्ष 2014 में छनियापुरा निवासी हरिकिशन राय से होमगार्ड ट्रेनिंग सेंटर परिसर के निकट दो प्लॉट खरीदे थे। खरीद के समय उन्हें बताया गया था कि भूमि विवादमुक्त है और वैध रूप से खरीदी गई है।
ब्रजेन्द्र राय के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद जब वह भूमि पर कब्जा लेने पहुंचे तो कुछ लोगों ने उस पर अपना दावा जताते हुए उन्हें कब्जा नहीं लेने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जा दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये की मांग की गई। उनका कहना है कि बाद में जानकारी करने पर पता चला कि संबंधित भूमि राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की सरकारी जमीन है, जिसके क्रय-विक्रय पर तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा रोक लगाए जाने का आदेश भी जारी किया गया था।
पीड़ित का आरोप है कि रोक आदेश के बावजूद भूमि से जुड़े एग्रीमेंट, बैनामे और नामांतरण किए गए। मामले में वर्ष 2023 में कोतवाली थाना पुलिस द्वारा कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
ब्रजेन्द्र राय का कहना है कि विवेचना के दौरान बिना पर्याप्त साक्ष्यों के अंतिम रिपोर्ट (एफआर) न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई। बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामले की पुनर्विवेचना के आदेश हुए। पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच में कमियां पाए जाने के बाद पुनः जांच शुरू की गई, लेकिन अब तक मामला किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका है।
उन्होंने कहा कि वह वर्षों से एसडीएम, पुलिस अधिकारियों और न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण कार्रवाई लंबित पड़ी हुई है।
ब्रजेन्द्र राय ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
उधर, जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है तथा जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।गौरतलब है कि झांसी में सरकारी एवं विवादित जमीनों से जुड़े कई मामले वर्षों से लंबित हैं, जिनमें पीड़ित पक्ष कार्रवाई और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
