झांसी। इबोला वायरस संक्रमण को लेकर जनपद का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के तहत झांसी में भी विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि इबोला प्रभावित देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान की यात्रा कर लौटे दो यात्रियों को चिन्हित किया गया है, जिनकी 21 दिनों तक सघन निगरानी की जा रही है।

सीएमओ ने बताया कि इबोला एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जिसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है। संक्रमित होने के 2 से 21 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते तथा गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूड़ों से रक्तस्राव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, पसीने, उल्टी, मल अथवा उसके कपड़ों और बिस्तर के संपर्क में आने से फैलती है। इसलिए प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों की विशेष निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन प्रभावित देशों से लौटे व्यक्तियों में किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमाकांत स्वर्णकार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 17 मई 2026 को कांगो, युगांडा और दक्षिणी सूडान में इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। इसके बाद प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि झांसी लौटे दोनों यात्रियों में फिलहाल किसी प्रकार के लक्षण नहीं पाए गए हैं, लेकिन आईडीएसपी यूनिट द्वारा प्रतिदिन टेलीफोनिक माध्यम से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि इनमें इबोला के लक्षण दिखाई देते हैं तो उनके नमूने लेकर जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे भेजे जाएंगे।
