मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

योगी दौरे में प्रशासन रहा केंद्र में, संगठन और मीडिया ने महसूस की दूरी

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झांसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया झांसी दौरे ने जहां प्रशासनिक मशीनरी की कार्यशैली और तैयारियों को सुर्खियों में रखा, वहीं संगठन, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से जुड़े कुछ मुद्दे भी चर्चा का विषय बने रहे। दौरे के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए जिन्होंने प्रशासन, संगठन और मीडिया के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री के दो दिवसीय दौरे में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता साफ दिखाई दी। विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान अधिकारियों को मुख्यमंत्री के साथ नजदीकी से कार्य करते और तस्वीरों में नजर आते देखा गया। दूसरी ओर भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना देखने को मिली कि उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिला।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का मिश्रण था, लेकिन कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में प्रशासन की भूमिका अधिक प्रभावी दिखाई दी। कई कार्यकर्ताओं का कहना रहा कि उन्होंने कार्यक्रमों की तैयारियों और व्यवस्थाओं में पूरा सहयोग दिया, इसके बावजूद उन्हें कार्यक्रम स्थलों पर अपेक्षित स्थान और सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

जनप्रतिनिधियों की नाराजगी

दीनदयाल सभागार में आयोजित विकसित भारत संकल्प कार्यक्रम के दौरान भी कुछ जनप्रतिनिधियों की नाराजगी चर्चा में रही।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के जारी भाषण के बीच ही एक माननीय जनप्रतिनिधि के मंच पर कुर्सी फ़ेंक कर निकल जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है तो कार्यक्रम के दौरान अपेक्षित सम्मान न मिलने से आहत एक अन्य जनप्रतिनिधि की सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है।

मीडिया व्यवस्थापन पर उठे सवाल

दौरे के दौरान प्रशासन की ओर से मीडिया व्यवस्थापन भी सवालों के घेरे में रहा । मुख्यमंत्री के दो दिवसीय दौरे को मीडिया से लगभग दूर ही रखा गया । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के झांसी दौरे की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर कई दिनों से चल रही थीं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब कार्यक्रम की रूपरेखा पहले से तय थी तो मीडिया के लिए पास जारी करने की प्रक्रिया मुख्यमंत्री के आगमन से महज 12-13 घंटे पहले क्यों शुरू की गई। इस दौरान जनपद में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का भी कार्यक्रम चल रहा था, जिसके कारण मीडिया कर्मी पहले से ही व्यस्त थे।

इसके बावजूद पत्रकार अपने दैनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए आवश्यक दस्तावेज लेकर जिला सूचना कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। लेकिन स्थिति तब और विचित्र हो गई जब योग दिवस कार्यक्रम के लिए प्रस्तावित पास कुछ समय बाद ही निरस्त कर दिए गए। आश्चर्य की बात यह रही कि इस संबंध में कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई कि आखिर पास किस स्तर पर और किन कारणों से रद्द किए गए।परिणामस्वरूप दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की कवरेज के दौरान अनेक मीडिया कर्मियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंच, कवरेज की व्यवस्था और समन्वय को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही।

मीडिया केवल समाचारों का प्रसार करने वाला माध्यम नहीं है, बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण सेतु भी है। सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बड़े सरकारी आयोजनों में मीडिया के लिए स्पष्ट, समयबद्ध और व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

यह मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि व्यवस्थापन का है। यदि मीडिया को समय पर आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो न केवल समाचारों का प्रसारण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी अनावश्यक सवाल खड़े होने की संभावना कम हो जाती है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासन को मीडिया प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि पारदर्शिता और सुशासन का संदेश व्यवहारिक रूप से भी उतना ही मजबूत दिखाई दे जितना मंचों से सुनाई देता है।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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