बालू माफिया का आतंक

बालू माफिया का आतंक, किसानों की जमीन पर जबरन खनन के आरोप

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झांसी। जनपद में टहरौली तहसील के कुकरगांव में निजी खनिज पट्टे की आड़ में बालू माफियाओं के सक्रिय होने का मामला सामने आया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि पट्टाधारक और उसके सहयोगी सीमांकन क्षेत्र से बाहर उनकी पैतृक कृषि भूमि में जबरन घुसकर अवैध खनन कर रहे हैं। विरोध करने पर असलहों के दम पर धमकाया जा रहा है। बालू माफिया का आतंकपीड़ित किसानों ने उपजिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। ग्राम पथरेडी निवासी शिव प्रताप सिंह के अनुसार गाटा संख्या 96, 99, 100 और 102 में जबरन खनन किया जा रहा है तथा पेड़ों की कटाई भी की जा रही है। वहीं कुकरगांव निवासी पप्पू पुत्र जूजे ने आरोप लगाया कि उसकी पैतृक भूमि (गाटा संख्या 124) से जबरन बालू से लदे ट्रकों का आवागमन कराया जा रहा है, जिससे खेतों को नुकसान हो रहा है। बालू माफिया का आतंककिसानों का कहना है कि पट्टाधारक और उसके सहयोगी सीमांकन क्षेत्र से बाहर किसानों की पैतृक कृषि भूमि में घुसकर एलएंडटी मशीनों और लिफ्टरों से अवैध खनन कर रहे हैं। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। साथ ही महिलाओं को आगे कर विवाद खड़ा करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी जाती है। बालू माफिया का आतंकगौरतलब है कि संबंधित खनन पट्टा पहले से ही विवादों में रहा है। किसानों का आरोप है कि बिना उनकी सहमति और सत्यापन के पट्टा स्वीकृत किया गया था। कुछ किसानों को मुआवजा दिया गया, जबकि कई अब भी प्रतीक्षा कर रहे हैं। मामले में एक किसान द्वारा न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जा चुका है और प्रकरण विचाराधीन है, इसके बावजूद खनन जारी रहने के आरोप हैं।

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। उपजिलाधिकारी टहरौली गौरव आर्या ने इस मामले में पहले तो  स्पष्ट बयान देने से इनकार कर दिया लेकिन बाद में कहा कि उन्होंने राजस्व की टीम और थाना टहरौली को सम्बंधित प्रकरण में  मार्क कर दिया  है यथेष्ट कार्रवाई की जाएगी ।

 किसानों के आरोप:
सीमांकन से बाहर खेतों में जबरन खनन
एलएंडटी मशीनों से अवैध बालू निकासी
विरोध पर असलहों से धमकी
महिलाओं को आगे कर विवाद कराने के आरोप
ओवरलोड ट्रकों से खेतों को नुकसान
मुआवजा अधूरा, मामला न्यायालय में विचाराधीन

कुकरगांव का मामला अवैध खनन और प्रशासनिक निष्क्रियता की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है। । यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों की जमीन और सुरक्षा दोनों पर खतरा और गहरा सकता है।

टीम
बुंदेलखंड कनेक्शन

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