झांसी। थाना प्रेमनगर पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन गेमिंग आधारित बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के कब्जे से साइबर अपराध में प्रयुक्त 8 मोबाइल फोन, 1 सिम कार्ड, 4 एटीएम कार्ड, चेक बुक तथा अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि यह गिरोह चाइनीज वेबसाइटों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्मों के माध्यम से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार अभियुक्तों में रागिब अहमद, सोहेल खान, अनुभव सिंह, दानिश खान, सौरभ विश्वकर्मा, देवेश कुमार गौतम निवासी थाना प्रेमनगर तथा सनी अमराया निवासी थाना सीपरी बाजार शामिल हैं।

एसएसपी ने बताया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड ध्रुव निवासी थाना नवाबाद, हाल निवासी इंदौर है, जो विभिन्न चाइनीज वेबसाइटों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्मों के जरिए साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाता था।
बैंक खाते, नेट बैंकिंग और यूपीआई से हो रहा था खेल
जांच में सामने आया कि गिरोह का सदस्य रागिब इंडोनेशिया की सिम का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न लोगों के बैंक खातों की यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग तैयार करता था। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी विदेशी व्हाट्सएप नंबरों के माध्यम से गिरोह के मुख्य संचालक तक पहुंचाई जाती थी।
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य सनी, सोहेल, अनुभव, दानिश, सौरभ और देवेश बैंक खाते उपलब्ध कराने का कार्य करते थे, जबकि हर्ष नामक आरोपी बैंक खातों से लिंक सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को बाद में सलाम नामक आरोपी द्वारा यूएसडीटी में परिवर्तित कर विभिन्न बाइनेंस खातों में भेजा जाता था, ताकि धनराशि की ट्रेसिंग न हो सके।
ऐसे होता था रन नेटवर्क
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह “वन बेट”, “कसीनो” समेत अन्य ऑनलाइन गेमिंग साइटों के माध्यम से लोगों को अधिक लाभ का लालच देता था। लोगों से रिचार्ज और पॉइंट खरीदने के नाम पर यूपीआई के जरिए धनराशि जमा कराई जाती थी।
एसएसपी ने बताया कि 500 रुपये से अधिक की उन धनराशियों, जिन पर साइबर शिकायत दर्ज हो जाती थी, उन्हें गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जीतने वाले खिलाड़ियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे संबंधित खाते फ्रीज हो जाते थे और वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था। वहीं 500 रुपये से कम के ट्रांजेक्शन, जिनकी शिकायत सामान्यतः दर्ज नहीं होती या जिनकी ट्रेसिंग कठिन होती है, उन्हें अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित कर यूएसडीटी में बदल दिया जाता था। बाद में इस रकम को गिरोह के सदस्यों और एजेंटों में कमीशन के रूप में बांट दिया जाता था।
25 दिनों में 4.35 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन
जांच के दौरान पिछले 25 दिनों में 19 बैंक खातों के माध्यम से 4 करोड़ 35 लाख 64 हजार 29 रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है। इसके अलावा चाइनीज वेबसाइटों से जुड़े लगभग 38 करोड़ रुपये मूल्य के वित्तीय लेन-देन तथा 114 बैंक खातों की जानकारी भी पुलिस को प्राप्त हुई है।
कार्रवाई के दौरान 529 यूएसडीटी फ्रीज किए गए हैं, जबकि लगभग 37 लाख 20 हजार रुपये के डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने अब तक 4 करोड़ 35 लाख 64 हजार 29 रुपये की धनराशि भी फ्रीज कराई है।
एसएसपी ने बताया कि मामले में ध्रुव, हर्ष निवासी नवाबाद तथा सलाम निवासी प्रेमनगर की तलाश जारी है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में ध्रुव को पूरे गिरोह का मुख्य सरगना माना जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस बड़े साइबर गिरोह का खुलासा करने वाली थाना प्रेमनगर पुलिस टीम की सराहना करते हुए 25 हजार रुपये के पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है।
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प्रेमनगर पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का किया खुलासा
25 दिनों में 19 बैंक खातों से 4.35 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन
चाइनीज वेबसाइटों से जुड़े लगभग 38 करोड़ के वित्तीय ट्रांजेक्शन आए सामने
114 बैंक खातों की जानकारी पुलिस को मिली
529 यूएसडीटी फ्रीज, 37.20 लाख के डिजिटल लेन-देन का खुलासा
थाना प्रेमनगर पुलिस टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की
