झांसी।महानगर में आवास विकास योजना संख्या-4 के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसानों और मकान मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। राज्यसभा सभापति कार्यालय से उत्तर प्रदेश शासन के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जनहित में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

22 जून 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि झांसी जनपद की आवास विकास योजना-4 संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र का संज्ञान लिया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा मौजा कोछाभांवर, टंकोरी, पिठौर और मुस्तरा में योजना संख्या-4 के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसमें पुनर्स्थापना अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में मकान निर्मित हैं, ऐसे में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। प्रभावित लोगों ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए वैकल्पिक स्थान पर योजना विकसित किए जाने की मांग की है।
राज्यसभा सभापति के निजी सचिव धर्मेन्द्र सिंह द्वारा भेजे गए पत्र में प्रमुख सचिव से अनुरोध किया गया है कि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिया जाए। साथ ही की गई कार्रवाई से सभापति कार्यालय को भी अवगत कराने को कहा गया है।
इस पत्र के सामने आने के बाद आवास विकास योजना-4 से प्रभावित किसानों, प्लॉट और मकान मालिकों में उम्मीद जगी है। संघर्ष समिति ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए राज्यसभा सभापति का आभार व्यक्त किया है।
प्रमुख बिंदु:
आवास विकास योजना-4 के भूमि अधिग्रहण पर उठा विवाद।
राज्यसभा सभापति कार्यालय ने शासन को भेजा पत्र।
किसानों ने पुनर्स्थापना अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया।
प्रभावित क्षेत्र में पहले से बने मकानों का दिया गया हवाला।
निष्पक्ष जांच और वैकल्पिक भूमि चयन की मांग।
संघर्ष समिति ने राज्यसभा सभापति का जताया आभार।
