प्राइवेट क्लीनिक का पंजीकरण निरस्त

इलाज में लापरवाही ,प्राइवेट क्लीनिक का पंजीकरण निरस्त

झांसी । मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ)डॉ शिशिर पुरी ने गर्भवती महिला के उपचार में  लापरवाही के आरोपों की पुष्टि होने के बाद महानगर के खंडेराव गेट स्थित ओम चाइल्ड एंड मेटरनिटी क्लीनिक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए क्लीनिक का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

यह कार्रवाई गर्भवती महिला के उपचार में कथित लापरवाही, आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और मेडिकल एथिक्स के उल्लंघन के आरोपों की जांच में पुष्टि होने के बाद की गई।

डॉ शिशिर पुरी

सीएमओ कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, सीपरी बाजार थाना क्षेत्र की पाल कॉलोनी निवासी भूपेंद्र कुशवाहा ने 19 अगस्त 2025 को अपनी पत्नी के उपचार को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में ओम चाइल्ड एंड मेटरनिटी क्लीनिक की चिकित्सक पर उपचार में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी द्वारा गठित समिति तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी ललितपुर स्तर पर भी कराई गई।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ओम चाइल्ड एंड मेटरनिटी क्लीनिक में ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एल.एस.सी.एस. (सीजेरियन ऑपरेशन) तथा एस.एन.सी.यू. जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद गर्भवती महिला का उपचार किया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि गर्भावस्था के आठवें माह में मरीज को एफसीएम इंजेक्शन लगवाने के लिए एक निजी अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के बिना इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

महिला की स्थिति गंभीर होने पर उसे तत्काल न्यू टाटा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां एल.एस.सी.एस. ऑपरेशन किया गया। हालांकि प्रसव के दौरान नवजात शिशु मृत पैदा हुआ।
जांच समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा कि मरीज को समय पर उचित चिकित्सकीय सलाह नहीं दी गई और चिकित्सा आचार संहिता (मेडिकल एथिक्स) का पालन भी नहीं किया गया। उपलब्ध अभिलेखों, जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आरोपों की पुष्टि होने पर सीएमओ ने ओम चाइल्ड एंड मेटरनिटी क्लीनिक का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए।

आदेश की प्रतिलिपि आयुक्त झांसी मंडल, जिलाधिकारी झांसी, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा शिकायतकर्ता को भी भेजी गई है। इस कार्रवाई को निजी स्वास्थ्य संस्थानों में निर्धारित मानकों और चिकित्सा आचार संहिता के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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