झांसी। बुंदेलखंड के झांसी में बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच पुलिस की साइबर अपराध से निपटने की कार्यशैली भी तेजी से बदल रही है।ऐसी घटनाओं में तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस न केवल संभावित आर्थिक नुकसान को रोक रही है, बल्कि ठगी का शिकार हुए लोगों की धनराशि भी वापस कराने में सफलता हासिल कर रही है। इसी क्रम में तीन अलग-अलग मामलों में पुलिस की सक्रियता इसका उदाहरण बनी।
ठगी गई रकम कराई वापस:
साइबर थाना पुलिस ने एक मामले में साइबर फ्रॉड के शिकार सुरेंद्र कुमार दुबे की ठगी गई रकम में से 50 हजार रुपये वापस उनके खाते में करा दिए। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के खातीबाबा निवासी सुरेंद्र कुमार के साथ हुए साइबर अपराध के मामले में साइबर थाना पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए यह रकम वापस कराई। धनराशि मिलने के बाद पीड़ित ने झांसी पुलिस की प्रशंसा करते हुए धन्यवाद पत्र भी दिया।
आर्थिक साइबर ठगी से बचाया:
एक अन्य मामले में साइबर सेल की तत्परता ने एक व्यक्ति को आर्थिक साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया। पंकज खरे के मोबाइल पर अज्ञात व्यक्ति ने एक लिंक भेजा था, जिसके जरिए मोबाइल हैक कर लिया गया। इसके बाद उनके व्हाट्सऐप से संपर्क में मौजूद लोगों को लगातार लिंक और संदेश भेजे जा रहे थे। साइबर सेल की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मोबाइल में मिली एपीके फाइल को हटाया, महत्वपूर्ण एप के पासवर्ड बदलवाए और बैंक खाते की जांच कराई। समय रहते कार्रवाई होने से संभावित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोक लिया गया।
इसी तरह प्रेमनगर थाना साइबर सेल ने 8 जुलाई को मनीष कुमार के साथ हुई 90 हजार रुपये की साइबर ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरी रकम होल्ड कराई। इसके बाद कोर्ट के आदेश के माध्यम से 26 अगस्त को पूरी 90 हजार रुपये की धनराशि पीड़ित को वापस करा दी गई। पीड़ित ने भी पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए धन्यवाद पत्र दिया।
इन मामलों से स्पष्ट है कि साइबर अपराध के मामलों में समय पर शिकायत और पुलिस की त्वरित कार्रवाई आर्थिक नुकसान को रोकने में अहम भूमिका निभा रही है। झांसी पुलिस द्वारा आमजन, बच्चों और महिलाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ ठगी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
साइबर ठगी होने की स्थिति में पुलिस ने लोगों से तत्काल 1930 पर कॉल करने और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
