बुद्धि, धैर्य और दूरदृष्टि का खेल है शतरंज
झांसी । हर वर्ष 20 जुलाई को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक खेल के उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव बुद्धि, रणनीतिक सोच, धैर्य, अनुशासन और दूरदृष्टि का सम्मान भी है। शतरंज ऐसा खेल है, जिसमें शारीरिक शक्ति से अधिक महत्व विवेक, संयम और सही समय पर सही निर्णय लेने का होता है।


‘सबसे तेज नहीं, सबसे दूर तक सोचने वाला खिलाड़ी जीतता है’
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर झांसी के जाने-माने शतरंज खिलाड़ी रह चुके और वर्तमान में बच्चों व युवाओं को शतरंज की बारीकियां सिखाने वाले कोच पारस श्रीवास्तव ने कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन को समझने और सही निर्णय लेने की कला है।
उन्होंने कहा कि शतरंज हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय शांत रहकर आगे की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए। जीवन में भी वही व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो वर्तमान के साथ-साथ भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है।
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस का संदेश भी यही है कि जीवन की बड़ी जीत केवल शक्ति से नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, धैर्य और दूरदृष्टि से हासिल होती है।
भारत को माना जाता है शतरंज की जन्मभूमि
शतरंज की उत्पत्ति भारत में मानी जाती है। प्राचीन भारत में इसे ‘चतुरंग’ कहा जाता था। इसमें सेना के चार अंगों—पदाति, अश्व, गज और रथ—का प्रतीकात्मक रूप शामिल था। बाद में चतुरंग फारस पहुंचा, जहां इसका स्वरूप बदलकर शतरंज बना और फिर यूरोप के रास्ते यह पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुआ।
1924 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) की स्थापना हुई थी। इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण 20 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के रूप में मनाया जाता है।
जीवन में सही निर्णय लेने की सीख देता है शतरंज
शतरंज हमें सिखाता है कि जीवन में हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहिए। एक छोटी-सी गलती पूरी बाजी का रुख बदल सकती है, जबकि धैर्य, संयम और दूरदृष्टि कठिन परिस्थितियों में भी सफलता का रास्ता खोल सकते हैं।
शतरंज में केवल आक्रमण ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि रक्षा, संतुलन, समय प्रबंधन और परिस्थितियों का सही आकलन भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि यह खेल बच्चों और युवाओं में तार्किक सोच तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारतीय खिलाड़ियों ने दुनिया में बढ़ाया देश का गौरव
आधुनिक भारत ने शतरंज की दुनिया को कई महान खिलाड़ी दिए हैं। विश्वनाथन आनंद ने विश्व चैंपियन बनकर भारत का गौरव बढ़ाया और देश में शतरंज की नई पीढ़ी को प्रेरित किया।
आज डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंद, अर्जुन एरिगैसी, आर. वैशाली और कोनेरू हम्पी जैसे भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर देश की प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारत में शतरंज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं।
बच्चों के मानसिक विकास में उपयोगी है शतरंज
शतरंज बच्चों में तार्किक क्षमता, स्मरणशक्ति, एकाग्रता, समस्या समाधान की योग्यता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायक माना जाता है। यही वजह है कि कई देशों में शतरंज को विद्यालयी शिक्षा और बच्चों के मानसिक विकास से भी जोड़ा जा रहा है।
आज के प्रतिस्पर्धी और तनावपूर्ण दौर में शतरंज बच्चों और युवाओं को शांत मन से सोचने, विकल्पों का मूल्यांकन करने और सही निर्णय लेने की सीख देता है।
“शतरंज का श्रेष्ठ खिलाड़ी वह नहीं जो सबसे तेज चलता है, बल्कि वह है जो सबसे दूर तक सोचता है।”
