
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही अधिवक्ता समुदाय दो स्पष्ट गुटों में बंटता नजर आ रहा है। आरोप-प्रत्यारोप और विरोध के बीच बार परिसर का माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है।
पिछले करीब पंद्रह दिनों के दौरान दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच दो बार सार्वजनिक रूप से हाथापाई और मारपीट की घटनाओं ने पूरे बार परिसर में चर्चा का विषय बना दिया है। जिस परिसर को कानून और संयम की मिसाल माना जाता है, वहां हुई इन घटनाओं ने अधिवक्ताओं के बीच बढ़ती खींचतान को उजागर कर दिया है। इस घटनाक्रम के बीच निवर्तमान पदाधिकारियों और एल्डर्स कमेटी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
एल्डर्स कमेटी द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 30 जून और 1 जुलाई को नामांकन प्रक्रिया होगी। इसके बाद 2 से 4 जुलाई तक आपत्तियां दर्ज की जाएंगी, 6 जुलाई को नाम वापसी होगी, 7 जुलाई को वैध प्रत्याशियों की सूची प्रकाशित की जाएगी तथा 15 जुलाई को मतदान और मतगणना कराई जाएगी।
युवा अधिवक्ता एड. रीतेश मिश्रा “राघवेन्द्र” ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि टहरौली बार संघ को आज तक उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से विधिवत संबद्धता प्राप्त नहीं हुई है, इसके बावजूद वर्षों से चुनाव कराए जाते रहे हैं। यह स्थिति चुनाव प्रक्रिया की वैधानिकता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता चन्द्रभान सिंह (सी.बी.) भी पहले ही अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। वहीं, युवा अधिवक्ता अमित कुमार शर्मा ने भी कथित अनियमितताओं का विरोध करते हुए नियमानुसार चुनाव कराने की मांग की है। इससे स्पष्ट है कि चुनाव को लेकर असंतोष अब कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है।
बार संघ के भीतर बढ़ती खींचतान, चुनाव प्रक्रिया पर उठते सवाल और अधिवक्ताओं के बीच बढ़ती दूरियां इस ओर संकेत कर रही हैं कि यदि समय रहते विवाद का समाधान नहीं निकला, तो यह चुनाव केवल नए पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टहरौली बार संघ की एकता और लोकतांत्रिक परंपरा की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन
