झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी के न्यायालय ने आठ वर्षीय दलित मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर घर से ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) विजय सिंह कुशवाहा एवं प्रीति चतुर्वेदी के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 3 जनवरी 2025 को थाना एरच में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि वह अपने पिता के साथ मजदूरी के लिए ग्राम पिरौना गया था। उसकी पत्नी और करीब आठ वर्षीय बेटी घर पर थीं। दोपहर में पत्नी जानवरों को पानी और भूसा डालने के लिए गई, इसी दौरान आरोपी राजकुमार पुत्र चतुर सिंह पटेल बच्ची को बहला-फुसलाकर मकान के सामने स्थित दुकान के पीछे ले गया।
आरोप के अनुसार, आरोपी बच्ची के साथ अश्लील हरकतें कर रहा था। इसी दौरान बच्ची की मां उसे तलाशते हुए वहां पहुंची तो आरोपी मौके से भाग निकला। मामले में थाना एरच में भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट तथा एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर राजकुमार पटेल को दोषी ठहराया गया। उसे धारा 131 भारतीय न्याय संहिता के तहत तीन माह के कठोर कारावास एवं एक हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 6 सपठित धारा 18 पॉक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।
