सरोजिनी नायडू पुण्यतिथि

लेखन से लेकर राजनीति तक अमिट कार्य करने वाली “सरोजिनी नायडू”

02 मार्च नयी दिल्ली । आज पुण्यतिथि है उस महान महिला व्यक्तित्व की जिसने न केवल नारी मन की कोमल भावनाओं को कविता के माध्यम से उजागर करते हुए अपने अभूतपूर्व काम से अमिट छाप छोड़ी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से अपनी प्रतिभा के बल पर “ भारत कोकिला” की उपाधि हासिल की बल्कि देश के स्वतंत्रतासंग्राम में पुरूष वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजी हुकूमत की बर्बरता भी झेली।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (08मार्च) से कुछ ही दिन पहले आज उस मजबूत व्यक्तित्व की महिला को नमन है जिसने शिक्षा, राजनीति, कविता के क्षेत्र से लेकर महिला अधिकारों और स्वतंत्रता संग्राम में एक मजबूत नेत्री के रूप में काम किया, इस महान व्यक्तित्व का नाम है “ सरोजिनी नायडू” ।

शिक्षा-दीक्षा कहां हुई

13 फरवरी 1879 में हैदराबाद के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार के जन्मी सरोजिनी बपचन से ही कलम की इतनी मजबूत थीं कि मात्र 12 साल की उम्र में ही उनकी जबरदस्त लेखन क्षमता से प्रभावित होकर हैदराबाद के निज़ाम ने इन्हें छात्रवृत्ति देकर पढाई के लिए लंदन भेजा। प्रारंभिक शिक्षा मद्रास में करने के बाद वह लंदन चली गयी और फिर उनकी उच्च शिक्षा कैम्ब्रिज में हुई। विवाद के बाद भी उनका लेखन बादस्तूर जारी रहा ।

प्रसिद्ध रचनाएं

उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में गोल्डन थ्रेसहोल्ड, द बर्ड ऑफ टाइम, द ब्रोकन विंग, नीलांबु, ट्रेवलर्स सांग, इत्यादि शामिल है। सरोजिनी नायडू के कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम और ब्रोकन विंग ने उन्हें एक कविता के क्षेत्र में एक श्रेष्ठ कवयित्री के रूप में स्थापित कर दिया।

राजनीति में योगदान

सरोजिनी नायडू ने स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरू मानने वाली सरोजिनी की लंदन में गांधी जी से मुलाकात के बाद राजनीति में सक्रियता बहुत अधिक बढ़ गयी। आजादी की जंग में जेल भी गयीं और आजादी के बाद देश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश में पद संभाला। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के क्षेत्र में भी बड़ा काम किया और देश में सबसे पुराने महिला संगठन “ अखिल भारतीय महिला परिषद से भी जुड़ी रहीं।

ऐसी अभूतपूर्व प्रतिभा की धनी सरोजिनी नायडू का दो मार्च 1949 को निधन हो गया लेकिन अपनी अनुपम कविताओं के साथ साथ महिलाओं के उत्थान के लिए किये गये उनके काम और एक राष्ट्रीय नेता के रूप में उनकी याद हमेशा हमारे साथ रहेगी।

डेस्क
बुंदेलखंड कनेक्शन

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