औद्योगिक कृषि वानिकी

औद्योगिक कृषि वानिकी से हो सकता है आय और वातावरण का समाधान

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झांसी । बुंदेलखंड के झांसी स्थित रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय  किसानों को औद्योगिक कृषि वानिकी लगाने हेतु प्रेरित कर रहा है जिससे किसानों की आय के साथ-साथ वातावरण संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके।

औद्योगिक कृषि वानिकी

विश्वविद्यालय के फार्म प्रक्षेत्र पर अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी डॉ. मनीष श्रीवास्तव व परियोजना प्रभारी डॉ. प्रभात तिवारी की अगवाई में विगत 04 वर्षों से शोध कार्य चल रहा है। जिसके अंतर्गत उन्नत औद्योगिक कृषि वानिकी के मॉडल लगाए गए हैं साथ ही अंतरफसल के रूप में कई प्रकार की फसलों पर शोध कार्य चल रहा है।

बुंदेलखंड की जलवायु के उपयुक्त औद्योगिक कृषि वानिकी के महत्वपूर्ण वृक्ष जैसे मीडिया डूबिया, गम्हार, कदम्ब और आरडू आधारित मॉडल स्थापित किए गए हैं, जो किसानों तथा शोध-छात्रों के शोध के प्रमुख केंद्र हैं, इन वृक्षों की खासियत यह है कि यह वृक्ष 4 से 5 वर्षों में तैयार हो जाते हैं तथा इनसे औद्योगिक उत्पाद जैसे – प्लाईवुड, फर्नीचर, माचिस उद्योग तथा कागज उद्योग आधारित उत्पाद बनते हैं जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा प्राप्त हो सकता है। कृषि वानिकी मध्यम में इन वृक्षों को 5ग5ए 5ग4ए 5ग3 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है।

औद्योगिक कृषि वानिकी

अंतरफसल के रूप में इन वृक्षों के साथ शुरुआती वर्षों में चना, मसूर तथा खेसारी की खेती की गई जिससे अच्छा उत्पादन दर्ज किया गया तथा जैसे ही वृक्ष बड़े हुए और शाखाओं का फैलाव ज्यादा बढ़ गया इसमें कंदीय फसलों जैसे हल्दी, अदरक और अरबी की खेती की जा रही है जिसका उत्पादन मोनोक्रॉपिंग की तुलना में कृषिवानिकी माध्यम में ज्यादा दर्ज किया गया है।

इस तकनीकी को प्रसार शिक्षा निदेशालय की देखरेख में किसानों की भूमि पर भी पहुंचाया जा रहा है, साथ ही इसके लिए फंड भी उपलब्ध कराया गया है, तथा पौधारोपण हेतु गड्ढे करने की मशीन भी किसानों को प्रदान की गई है।

औद्योगिक कृषि वानिकी

प्रथम चरण में  जिले के बड़ागांव ब्लॉक के रोनिजा गांव में 12 किसनों की भूमि पर इन मॉडलों को स्थापित किया गया है, जो समीपवर्ती गांव के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। इस मानसून के मौसम में और भी किसानों को जोड़ा जा रहा है जिससे इस तकनीकी का लाभ किसानों को मिल सके। औद्योगिक कृषि वानिकी के उन्नत वृक्ष किसानों को मॉडल स्थापित करने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी व विभागाध्यक्ष डॉ मनमोहन डोबरियाल द्वारा लगातार इस हेतु मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

औद्योगिक कृषि वानिकी लगाने से जहां एक ओर किसानों को अच्छा मुनाफा होता है, वहीं दूसरी ओर वातावरण संबंधी समस्याओं का भी समाधान होता है। वृक्षों द्वारा कार्बन और प्रदूषण का अवशोषण होता है मिट्टी की नमी संरक्षित होती है तथा वृक्ष मृदा संरचना में सुधार व बेहतर जल प्रबंधन की भी क्षमता रखते हैं। इस प्रकार की कृषि वानिकी अपनाने से वन – क्षेत्र में भी वृद्धि होती है।

कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने रोनिजा गांव पहुंचकर स्थापित कृषि वानिकी के मॉडलों का अवलोकन किया है साथ ही ज्यादा से ज्यादा किसानों को इससे जोड़ने की सलाह देते हुए कहा है कि बुंदेलखंड में इस बार बारिश अच्छी हो रही है तथा वन महोत्सव सप्ताह भी मनाया जा रहा है, उन्होंने कहा कि इस मौसम में वृक्ष रोपित करने का उपयुक्त समय है और किसान औद्योगिक कृषि वानिकी तथा खेत की मेड़ों पर वृक्ष लगा सकते हैं।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेेक्शन

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