गूगल भारत में पैनल्टी

गूगल भारत में भरेगा पैनल्टी,मोबाइल्स में नये फीचर आने का रास्ता हुआ साफ

नयी दिल्ली 22 जनवरी । इंटरनेट पर आधारित उत्पाद एवं सेवाएं विकसित करने वाली अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी (एमएनसी)“गूगल” को भारत में अभी तक मोबाइल फोन के क्षेत्र में जमाए एकाधिकार की भारी कीमत 2200 करोड से अधिक के जुर्माने के रूप में चुकानी होगी । हाल ही में आये सुप्रीम कोर्ट से साफ हो गया है कि गूगल किसी भी तरह से इस जुर्माने से बच नहीं सकता , उसे यह कीमत चुकानी ही होगी।

किस कारण से लगा जुर्माना

गूगल प्ले स्टोर से खरीदे जाने वाले एप्स पर यह दबाव बनाता है कि वे एप से जुड़े हर पेमेंट को गूगल पे के ज़रिए ही प्रोसेस करे। यदि एप स्टोर से कुछ भी खरीदा जाए तो उसके लिए गूगल पे ही मेंडेट्री होना चाहिए। इसके अलावा गूगल एंडरॉयड फोंस में बंडल के रूप में अपने एप्लीकेशन डालता है जिन्हें कोई माेबाइल ग्राहक अपनी ओर से अपने फोन से हटा भी नहीं सकता है। इस तरह से गूगल ने भारतीय बाजार में इस क्षेत्र में किसी और कंपनी के प्रवेश की संभावनाओं पर ही प्रभावी रोक लगाते हुए एकाधिकार की स्थिति बना रखी थी। गूगल के इस एकाधिकारवाद पर कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की वक्रदृष्टि पड़ी।

सीसीआई क्या है

सीसीआई भारत सरकार की संस्था है जो यह निर्धारित करती है कोई भी कंपनी भारत में बाजार पर एकाधिकार कायम न कर ले। वर्तमान में इसके अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता हैं। यह संस्था निधारित करती है कि बाजार में एक कंपनी के अलावा दूसरी कंपनियों को भी कारोबार करने की आजादी मिले। इसी संस्था ने गूगल के इस तरह से दबाव बनाकर काम करने की नीति की जांच की और पाया कि गूगल भारत में पूरी तरह से अपना एकाधिकार कायम करने में लगा है । देश में सभी एंडरॉयड फोन गूगल चला रहा है और देश में इस्तेमाल होने वाले सर्च इंजनों में 98 प्रतिशत सर्च इंजन गूगल ही लगाया जा रहा है। इसके बाद सीसीआई ने 20 अक्टूबर 2022 को गूगल पर 2200 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोक दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गयी।

गूगल पहुंचा एनसीएलएटी

गूगल सीसीआई के फैसले के खिलाफ 24 दिसंबर 2022 को एनसीएलएटी की शरण में पहुंचा लेकिन उसने भी सीसीआई की पैनल्टी को रोकने से मना कर दिया साथ ही यह भी कहा कि अगले सात दिन में जुर्माने की 10 प्रतिशत राशि जमा करा दें। यहां सं भी गूगल को कोई राहत नहीं मिली दूसरी ओर उसे 19 जनवरी से पहले यह जुर्माना जमा कराना था इसी कारण वह आनन फानन में सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ जिसमें देश के मुख्यन्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाल थे , इस खंडपीठ ने मामले को सुना । मामले की सुनवायी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गूगल के खिलाफ सीसीआई की जांच की सही माना और पैनल्टी को लागू रखा है। कंपनी को थोडी राहत देते हुए 19 जनवरी के बाद अगले सात दिन में जुर्माने की राशि जमा करने को कहा गया है। गूगल का केस अभिषेक मनुसिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में लगा और भारत सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने न्यायालय में रखा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि गूगल को भारत में 2200 करोड़ से अधिक का जुर्माना भरना होगा। भारतीय कंपनियों इस फैसले को लैंडमार्क फैसले की संज्ञा दी है। गूगल पर भारत के अलावा दुनिया भर में यूराेपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य जगहों पर भी विभिन्न नीतियों को लेकर जुर्माना लगता रहा है। हाल ही में यूरोपियन यूनियन पर जुर्माना ठोका था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मोबाइल फाेंस में क्या आ सकते हैं बदलाव

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गूगल को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। बहुत संभव है कि गूगल भारत में व्यापार को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव करें। मोबाइल फोंस में इनबिल्ट एप्स को हटाया जा सकता है या फिर ग्राहक को इन्हे हटाने की विकल्प दिया जा सकता है। अब ऑपरेटिंग सिस्टम एंडरॉयड की जगह अब किसी और कंपनी का भी इंस्टॉल किया जा सकेगा इसके अलावा फोन निर्माता कंपनियों को मोबाइल में सर्च इंजन के रूप में केवल गूगल को ही इंस्टॉल करने से आजादी मिल पायेगी।

डेस्क

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