सरकारी भूमि पर कब्जों के आरोप

टहरौली में सरकारी भूमि पर कब्जों के आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग

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झांसी। जनपद में   टहरौली क्षेत्र में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कथित अवैध कब्जों को लेकर एक बार फिर शिकायतकर्ताओं ने आवाज उठाई है। क्षेत्र के कुछ समाजसेवियों, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को सामूहिक शिकायती पत्र भेजकर मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि तहसील क्षेत्र में नई आबादी, मरघट, गोचर भूमि, खलिहान, खेल मैदान, कन्या पाठशाला, चकरोड, तालाब और सड़क किनारे स्थित सार्वजनिक भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण और निर्माण होते रहे हैं। उनका दावा है कि इनमें से कई मामलों में पूर्व में अतिक्रमण हटाने के आदेश भी जारी किए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं हो सका।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में राजस्व अधिकारियों और भूमाफियाओं की कथित मिलीभगत के कारण स्थिति गंभीर होती गई। शिकायतकर्ताओं ने कुछ प्रमाण-पत्रों के निर्गमन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही प्रस्तावित नगर पंचायत टहरौली से जुड़े कुछ प्रशासनिक निर्णयों और शासनादेशों के अनुपालन को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
शिकायतकर्ताओं में बाबूसिंह यादव, सुरेंद्र प्रजापति, अंकित गौतम, जाहर सिंह यादव सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच स्थानीय स्तर के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय टीम से कराई जाए, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित राजस्व अधिकारियों अथवा प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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