झांसी।महानगर स्थित रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) के वैज्ञानिकों के साथ संवाद बैठक आयोजित की गई।
बैठक में बुंदेलखंड की कृषि चुनौतियों, जलवायु अनुकूल खेती और प्रमुख फसलों के अनुसंधान को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। कनाडा के डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड और ब्राजील से जुड़ी कृषि वैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा क्रिस्टीना कोथे मिलाच ने विश्वविद्यालय का दौरा किया।
आईसीआरआईएसएटी के लचीली कृषि प्रणालियों से संबंधित वैश्विक अनुसंधान कार्यक्रम के निदेशक डॉ. रमेश सिंह के आयोजन में हुई बैठक की अध्यक्षता कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने की।
कृषि विश्वविद्यालय में बैठक में चर्चा :
आईसीआरआईएसएटी के अनुसंधान एवं नवाचार उप महानिदेशक डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने बुंदेलखंड में मूंगफली और मोटे अनाज के अनुसंधान की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत किस्मों के विकास के लिए उपयोगी आनुवंशिक संसाधन उपलब्ध कराने में सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही, आगामी वर्ष आईसीआरआईएसएटी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के साथ सहयोग की इच्छा जताई।
कुलपति के सुझाव पर डॉ. ब्लेड ने अरहर की उन्नत किस्मों के विकास और प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त अनुसंधान शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्में विकसित करने और अरहर की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
सीजीआईएआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा क्रिस्टीना कोथे मिलाच ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी किसानों तक पहुंचेगा, जब वैज्ञानिक संस्थान उनके साथ मिलकर काम करें। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, टिकाऊ खेती और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों का विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय:
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र, समेकित कृषि प्रणाली इकाई, मधुमक्खी पालन इकाई और उच्च तकनीकी नर्सरी का विश्वविद्यालय किया। निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय में संचालित अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी।
