झांसी। अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने शुक्रवार को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। चार बार के पूर्व सांसद एवं बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के संयोजक गंगा चरण राजपूत को भाजपा के तीन बार के झांसी सदर विधायक रवि शर्मा का खुला समर्थन मिलने से बुंदेलखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। इसे आंदोलन के लिए अब तक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।
स्थानीय लेमन ट्री होटल में आयोजित सम्मेलन में गंगा चरण राजपूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्ष 1948 में गठित बुंदेलखंड राज्य को पुनः बहाल करने की मांग दोहराते हुए कहा कि वे जीवन की अंतिम सांस तक इस आंदोलन को जारी रखेंगे। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1948 में बुंदेलखंड की 32 रियासतों के भारत संघ में विलय के समय अलग बुंदेलखंड राज्य की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन के दौरान इसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विभाजित कर दिया गया।

सदर विधायक रवि शर्मा ने की समर्थन देने की घोषणा
भाजपा के तीन बार के सदर विधायक रवि शर्मा ने गंगा चरण राजपूत के आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की। राजनीतिक जानकार इसे इसलिए भी अहम मान रहे हैं क्योंकि अब तक अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग मुख्यतः सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय मंचों तक सीमित रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल के एक प्रभावशाली विधायक के समर्थन ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक ऊर्जा दे दी है।
गंगा चरण राजपूत ने कहा कि अलग बुंदेलखंड राज्य बनने पर क्षेत्र के युवाओं को रोजगार, स्थानीय स्तर पर सरकारी भर्तियां, किसानों और मजदूरों को बेहतर सुविधाएं, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और निजी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने घोषणा की कि बुंदेलखंड राज्य बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
सम्मेलन में बुंदेलखंड क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार सत्येंद्र पाल सिंह, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महामंत्री दिनेश भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा, संपादक रामसेवक अरजरिया, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रेनू गोस्वामी, लोक कलाकार राधा प्रजापति, शिक्षक नेता रामसिया यादव सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, पत्रकारों, कलाकारों, खिलाड़ियों और ग्राम प्रधानों ने भी आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया।
झांसी सदर विधायक रवि शर्मा के समर्थन के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग स्थानीय आंदोलन तक सीमित रहती है या आने वाले समय में प्रदेश की मुख्यधारा की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनती है।
वैभव सिंह

बुंदेलखंड कनेक्शन
