झांसी। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने बुधवार को बमौर विकास खंड में अंतरराष्ट्रीय अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईसैट) द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य कृषि विकास कार्यक्रम के सहयोग से संचालित जल एवं भूमि संरक्षण परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना के तहत किए गए कार्यों का अवलोकन करते हुए इसकी सराहना की और जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
“झांसी जनपद में कृषि आजीविका सुदृढ़ीकरण हेतु परिदृश्य संसाधन संरक्षण” नामक यह परियोजना बमौर एवं गुरसराय विकास खंड के 25 गांवों में 13,872 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य भूमि एवं जल संसाधनों का संरक्षण, कृषि उत्पादन में वृद्धि, भूजल स्तर में सुधार, जलवायु सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों की आजीविका को सशक्त बनाना है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने ग्राम नागर में पुनर्जीवित हवेली प्रणाली, ग्राम सैगुवां के सामुदायिक तालाब, नालों के गहरीकरण एवं चौड़ीकरण तथा खेतों पर कराए गए मेड़बंदी कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा मिट्टी एवं जल संरक्षण पर इन कार्यों के प्रभावों की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन समिति एवं प्रगतिशील बुंदेलखंड किसान उत्पादक कंपनी के पदाधिकारियों आशीष उपाध्याय, पुष्पेंद्र सिंह बुंदेला, रामप्रकाश पटेल और संजीव बिरथरे से संवाद किया। किसानों ने बताया कि परियोजना के कारण क्षेत्र में जल उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे कृषि कार्यों को लाभ मिल रहा है। साथ ही मोटे अनाज, दलहन एवं तिलहन की उन्नत किस्मों तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने कहा कि भूमि एवं जल संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्य बुंदेलखंड के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय संसाधनों और कर्मचारियों के माध्यम से इस मॉडल को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान तकनीकी मार्गदर्शन एवं क्षमता निर्माण में सहयोग देकर ऐसे प्रयासों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संस्थान की ओर से आर.के. उत्तम, डॉ. अशोक शुक्ला, शुवेन्द्र कुमार, अभियंता दीपक त्रिपाठी, सुनील कुमार निरंजन एवं शैलेन्द्र सोनी ने परियोजना के विभिन्न कार्यों की जानकारी दी।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं जल संरक्षण, कृषि विकास और किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी प्रभावी साबित हो सकती हैं।
