झांसी। बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे सत्याग्रह पर पुलिस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय समेत अन्य अनशनकारियों को नवाबाद पुलिस ने रात में सोते समय उठाकर थाने पहुंचा दिया। इसकी खबर मिलते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य समेत आंदोलन के समर्थक थाने पहुंच गए। वहां नारेबाजी कर विरोध जताया गया।
घटनाक्रम:
घटनाक्रम के बीच पुलिस ने अनशनकारियों को नगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें रिहा कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि हिरासत और जेल भी अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग के उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते।
आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक, भानू सहाय के साथ बाबूसिंह यादव, प्रदीप झा और लालूराम बुंदेलखंड राज्य के गठन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अनशन कर रहे थे।
आरोप है कि पुलिस ने रात में सोते समय उन्हें उठाकर नवाबाद थाने पहुंचा दिया। अनशनकारियों को हिरासत में लिए जाने की सूचना फैलते ही समर्थकों का थाने पर पहुंचना शुरू हो गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के साथ राजेंद्र शर्मा एडवोकेट, अरविंद बब्लू, प्रफुल्ल तिवारी, घनश्याम कोरी, शैलेंद्र उर्फ शैलू, योगेंद्र सिंह पारीछा, यथूब जैन पिंकी, अमित करौसिया, अखिलेश गुरुदेव, जगमोहन मिश्रा, समेत अन्य लोग थाने पहुंचे। समर्थकों ने नारेबाजी कर अनशनकारियों के प्रति समर्थन जताया।
थाना परिसर में समर्थकों की भीड़ जुटने के बाद पुलिस ने सभी अनशनकारियों को नगर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि उन्हें जेल भेजा जाता तो वहां भी बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर अनशन जारी रखते। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखने और आगे की रणनीति तैयार करने का ऐलान किया।
अन्य राजनीतिक दलों के समर्थक आये आगे :
अनशनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंचाने की कवायद भी शुरू हो गई है। बुंदेलखंड क्षेत्र कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता एवं अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के अनशन और सत्याग्रह की जानकारी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दी है। अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों ने भी पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही है।
आंदोलनकारियों ने अपने रुख में नरमी के संकेत देने के बजाय संघर्ष जारी रखने की बात कही। उनका कहना है कि बुंदेलखंड राज्य का गठन उनका लक्ष्य है और इसके लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। हिरासत की कार्रवाई के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
