न्यायालय का आदेश

पुलिस की गंभीर लापरवाही पर अदालत का कड़ा रुख़,दो माह में जांच पूरी करने का आदेश

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झांसी 05 अप्रैल। झांसी जिले के चिरगांव थाना पुलिस की भूमि विवाद से जुड़े एक मामले की चार साल से भी अधिक समय से चल रही जांच पर विशेष न्यायाधीश (द०प्र०क्षे०),सुयश प्रकाश श्रीवास्तव के न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच दो माह में पूरी कर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

          न्यायालय द्वारा थाना प्रभारी चिरगांव को आदेश किया गया है कि इस आदेश की तिथि से दो माह में अग्रिम विवेचना सम्पन्न कर न्यायालय को आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे। समुचित कार्यवाही न होने की स्थिति में उनके विरूद्ध यथोचित विधिक कार्यवाही करने के अतिरिक्त न्यायालय के समक्ष अन्य कोई विकल्प नहीं होगा। 

          पुलिस की इस गंभीर लापरवाही से परेशान होकर वादी ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने पूरे मामले को देखने के बाद चिरगांव थाना प्रभारी को विवेचना दो माह में पूरी करने का आदेश दिया है।

          गौरतलब है कि मातनपुरा चिरगांव निवासी मधुसूदन शर्मा की शिकायत पर अभियुक्तगण बसन्त कुमार आदि के खिलाफ धारा 419,420,467,468,471, 387,504,506के तहत 2016 में मुकदमा दर्ज किया गया था। वादी ने आरोप लगाया था कि उसके मालिकाना हक वाली कीमती भूमि पर कब्जा कर गैर कानूनी तरीके से कूटरचित दस्तावेज के सहारे क्रय-विक्रय कर किराया वसूला जा रहा है। विरोध करने पर गाली गलौज एवं जान से मारने की धमकी देते हुये पचास लाख रूपये की अवैध माँग की जा रही है।

            पुलिस ने मामले की जांच कर अंतिम रिपोर्ट (आख्या) न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दी। वादी ने गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया और दोबारा जांच की मांग की। इस पर न्यायालय द्वारा 15 मार्च 2018 को थाना चिरगांव को निर्देशित किया कि किसी सक्षम एसआई से अग्रिम विवेचना कराये तथा रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें।
निर्गत आदेश से लगभग साढ़े चार वर्ष व्यतीत होने व एफआईआर से लगभग 06 वर्ष व्यतीत हो चुके है। अभियुक्तगण अपने कूटरचित व धोखाधड़ी के कार्यों को कर रहे है अनैतिक माँग की जा रही है। वादी एवं उसके परिवार को खतरा है।पुलिस अधिकारियों को प्रकरण में शीघ्रता करने व विपक्षीगण द्वारा दी जा रही धमकियों, अवैध कब्जे के संदर्भ में अवगत कराया जा रहा है परन्तु वह झूठा आश्वासन देकर टाल रहे है ।

            वादी द्वारा न्यायालय के आदेश 15 मार्च 2018 की अवेहलना किये जाने व दोषपूर्ण/ गैर विधिक तरीके से सम्पादित कराई जा रही विवेचना के सन्दर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रकरण में शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया हेतु यथा उचित आदेश पारित करने की याचना की गई।
तत्कालीन क्षेत्राधकारी मोठ द्वारा दिनांक 02 जून 2022 को इस अभियोग के शीघ्र निस्तारण हेतु विवेचक को निर्देशित करने के सम्बन्ध में आख्या प्रेषित की गयी थी परंतु इस सम्बन्ध में अपेक्षित कार्यवाही नहीं हुयी।

          इस पूरे मामले पर  न्यायालय द्वारा थाना प्रभारी चिरगांव को आदेशित किया गया है कि इस आदेश की तिथि से दो माह में अग्रिम विवेचना सम्पन्न कर न्यायालय को आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

वैभव सिंह

बुंदेलखंड कनेक्शन

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