झांसी कृषि विश्वविद्यालय

दिल्ली में हुई कृषि बैठक में वर्चुअली जुड़ा झांसी कृषि विश्वविद्यालय

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झांसी 03 सितंबर। बुंदेलखंड के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मी बाई कृषि विश्वविद्यालय आज देश की राजधानी दिल्ली के कृषि भवन में हुई बैठक से वर्चुअली जुड़ा।

कृषि शोध में परिवर्तन लाने में निजी क्षेत्र की भूमिका विषय पर कृषि भवन में केन्द्रीय कृषि किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी की अध्यक्षता में आज  आयोजित की गयी। संगोष्ठी बैठक में रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विवि  सहित देश के सभी कृषि विवि, कृषि संस्थाए एवं कृषि विज्ञान केन्द्र इस संगोष्ठी में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुई।

झांसी कृषि विश्वविद्यालय

कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने सभी अतिथियों का स्वागत परिचय कराते हुए इस कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विवि के शोध को और बेहतर बनाना है। वैज्ञानिक प्रयोगों को खेत तक ले जाना है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने देश में केन्द्रीय कृषि विवि, अनेक कृषि संस्थाना, केवीके के योगदान के विषय में बताया। उन्होंने प्रमुख बिंदुओं जैसे  जलवायु परिवर्तन, किसानों की आय आदि विषयों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ने प्राइवेट सेक्टर के साथ किसानों के हित में कई समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इनका लाभ किसानों तक पहुॅचाना है। शोध के स्तर एवं निवेश को और बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर और सरकारी संस्थाएं दोनों मिलकर कार्य करें जिससे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ दिलाया जा सकें।
अध्यक्षीय संबोधन में केन्द्रीय कृषि किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने निजी क्षेत्र का कृषि शोध में योगदान बढ़ाने पर जोर दिया। देश का किसान समृद्ध बने इस पर कृषि मंत्रालय को कार्य करना है । देश का किसान आज रासायनिक खाद पर निर्भर होकर रह गया है, जिसे कम करने एवं मृदा स्वास्थ्य बढ़ाने की आवश्यकता है।
केवीके सहित तमाम कृषि संस्थाएं, एफपीओ किसानों को प्राकृतिक खेती करने की सलाह दें। किसान की खेती की लागत कम हो लाभ उनको ज्यादा मिले। रासायनिक खाद का प्रयोग करने से उससे पैदा होने वाले अन्य से मनुष्यों में तो रोग बढ़ ही रहे हैं इसके साथ – साथ पशु पक्षी अन्य के लिए भी हानिकारक साबित हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम में पूर्व सचिव (डीएआरई) और महानिदेशक (आईसीएआर) डॉ. एस. अय्यप्पन, सीईओ एनआरएए कृषि मंत्रालय, डॉ. अशोक दलवई, पूर्व कुलपति जेएनयू प्रो. सुधीर के. सोपोरी, पूर्व डीजी आईसीएआर डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा, पीजेटीएसएयू हैदराबाद के पूर्व कुलपति डॉ. प्रवीण राव, प्रमुख सचिव उड़ीसा डॉ. अरविंद कुमार पाढी, चेयरमेन एनएसएआई, प्रभाकर राव, पद्मश्री किसान कमल सिंह चौहान, पूर्व निदेशक आईएआरई डॉ. एके सिंह, कुलपति आनन्द कृषि विवि गुजरात डॉ. केवी कथारिया आदि ने भूजल, जलवायु परिवर्तन, आधुनिक कृषि, प्राकृतिक खेती, बीज रेट निर्धारण, किसान के साथ सांझा खेती, कृषि शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा, निजी क्षेत्र में कृषि संस्थानों की भागीदारी, धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन के शोध में बढ़ोत्तरी करना आदि विषयों पर विभिन्न सुझाव रखे।
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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