झांसी। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पुष्प वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका शर्मा और पुष्प विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव शर्मा ने किसानों एवं बागवानी प्रेमियों को नर्सरी तैयार करने की वैज्ञानिक तकनीक बताई है।उन्होंने बताया कि सर्दियों के मौसम में खेत और बगीचों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाने की तैयारी का समय आ गया है। सितंबर-अक्टूबर में मौसमी फूलों की नर्सरी तैयार करना पौध की अच्छी गुणवत्ता के लिए सबसे अहम है।
मौसमी फूलों की नर्सरी
इन फूलों की तैयार करें पौधवैज्ञानिकों के अनुसार एन्टिराइनम, कैलेंडुला, स्वीट पी, स्वीट विलियम, स्वीट एलाइसम, कैंडीटफ्ट, लार्कसपर, पेटूनिया और पैंजी जैसे प्रमुख मौसमी फूलों की नर्सरी सितंबर-अक्टूबर में तैयार की जा सकती है। अक्टूबर-नवंबर में पौध खेत या बगीचे में लगाई जा सकती है। वहीं स्वीट पी, ल्यूपिन और नास्टरशियम जैसी फसलों को सीधे खेत में बीज बोकर भी उगाया जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण पौध के लिए नर्सरी की मिट्टी उपजाऊ, भुरभुरी, जल निकास वाली और रोगमुक्त होना जरूरी है। क्यारी तैयार करने के लिए मिट्टी, गोबर की खाद और रेत को 1:1:1 या 2:1:1 के अनुपात में मिलाने की सलाह दी गई है। करीब एक मीटर चौड़ी क्यारी में बीजों को संबंधित प्रजाति के अनुसार 0.5 से 2 सेंटीमीटर गहराई और 5 से 10 सेंटीमीटर दूरी पर बोना चाहिए।
बीजों को हल्की मिट्टी से ढकने के बाद फव्वारे से सिंचाई करें और अंकुरण तक क्यारी को सूखी घास या बोरी से ढककर रखें। अंकुर निकलते ही आवरण हटा दें। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि नर्सरी में अधिक पानी नुकसानदायक हो सकता है।
सामान्यतः 25 से 30 दिन में पौध प्रतिरोपण के लिए तैयार हो जाती है। पौध को पहले से तैयार खेत में शाम के समय लगाना बेहतर रहता है। इससे पौधों को शुरुआती दिनों में तेज धूप और तापमान के तनाव से बचाने में मदद मिलती है। बीज बोने से पहले फसल की फफूंदनाशक या जैव-एजेंट से बीज उपचार करने की भी सलाह दी है।
वैज्ञानिकों के अनुसार समय पर तैयार की गई स्वस्थ पौध से फूलों की बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है। किसान मौसमी फूलों की व्यावसायिक खेती के जरिए खेतों की सुंदरता बढ़ाने के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी हासिल कर सकते हैं।
