झांसी। यूजीसी अधिसूचना, एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आरक्षण के विरोध में गुरुवार को सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों और वर्गों के लोगों ने झांसी में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। गांधी उद्यान कचहरी चौराहे से शुरू हुई आक्रोश रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
विरोध प्रदर्शन में ब्राह्मण, क्षत्रिय, गहोई, अग्रवाल, कायस्थ और सिंधी समाज के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने संशोधित यूजीसी अधिसूचना पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने और सभी वर्गों के लिए समान एवं संतुलित नीति बनाने की मांग की।
राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ के प्रदेश महासचिव एवं कार्यक्रम संयोजक धीरज मिश्रा ने कहा कि संशोधित यूजीसी अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाई गई है, लेकिन सवर्ण समाज का मानना है कि इसके प्रावधान संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति में सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों और हितों का समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।
बुंदेलखंड अध्यक्ष डॉ. प्रशांत रिछारिया ने आरोप लगाया कि अधिसूचना में सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। वहीं जिलाध्यक्ष ऋषिकेश रावत ने कहा कि किसी भी कानून अथवा नियम का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रमुख महामंत्री संजय राष्ट्रवादी ने अधिसूचना में कथित रूप से झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के संबंध में दंडात्मक प्रावधान न होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसके दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए स्पष्ट और संतुलित प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने स्थायी समाधान के रूप में सवर्ण आयोग के गठन की भी मांग उठाई।
क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि एवं राजा भैया यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष ठाकुर मधुपाल सिंह ने सामान्य वर्ग के नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की। कायस्थ समाज के प्रतिनिधि मंगल श्रीवास्तव ने कहा कि देश के विकास और प्रशासन में सामान्य वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और सरकार को सभी वर्गों के हितों को समान दृष्टि से देखना चाहिए।
सिंधी समाज के प्रतिनिधि सुरेश मनकानी ने यूजीसी अधिसूचना को वापस लेने तथा निष्पक्ष और संविधान सम्मत नीति बनाने की मांग की। गहोई समाज के प्रतिनिधि पंकज गुप्ता ने कहा कि जब तक मांगों पर विचार नहीं किया जाता, सवर्ण समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपना विरोध जारी रखेगा।
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी अधिसूचना की समीक्षा, जातिगत आधार पर होने वाले कथित भेदभाव को समाप्त करने, सामान्य वर्ग के हितों की सुरक्षा और सवर्ण आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई।
इस दौरान कायस्थ समाज से मंगल श्रीवास्तव, आचार्य एनसी श्रीवास्तव और शिवांशु श्रीवास्तव, गहोई समाज से रामप्रकाश नाछोला, नरेश गुप्ता, प्रकाश गुप्ता और आशीष गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। क्षत्रिय समाज से ठाकुर मधुपाल सिंह, देवेंद्र सिंह सेंगर, लाखन सिंह, सकेंद्र सिंह और सुमंत सिंह शामिल हुए।
ब्राह्मण समाज से धीरज मिश्रा, डॉ. प्रशांत रिछारिया, संजय राष्ट्रवादी, ऋषिकेश रावत, डॉ. विवेक बाजपेई, शिवम भार्गव सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे।
