झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी पटेल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जमकर सराहना की, लेकिन साथ ही परिसर की छोटी-छोटी कमियों पर प्रशासन को आईना भी दिखाया। उन्होंने साफ कहा कि बड़ी उपलब्धियां हासिल करना अच्छी बात है, लेकिन विद्यार्थियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में कमी नहीं रहनी चाहिए। छात्रावास के खाने की गुणवत्ता, वाई-फाई की कमजोर रेंज, सफाई, कबाड़, बिजली और लिफ्ट जैसी व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने कुलपति से मंच से ही सवाल किए।
गांधी सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदी पटेल के साथ उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव और कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय मौजूद रहे। समारोह में 34,947 उपाधियां एवं पदक छात्र-छात्राओं को प्रदान किए गए।


छात्राओं का रहा दबदबा
असाधारण शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाली छात्रा आकांक्षा रावत ने 94.20 प्रतिशत अंक हासिल कर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। एमएससी कृषि उद्यान विज्ञान की छात्रा आकांक्षा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक के साथ छात्राओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर कुलाधिपति रजत पदक भी प्रदान किया गया।

समारोह में 35 कुलाधिपति पदक प्रदान किए गए। इनमें 12 पदक ग्रामीण क्षेत्र और 21 पदक शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों ने हासिल किए। कुलाधिपति पदकों में छात्राओं ने करीब 80 प्रतिशत पदक अपने नाम किए, जबकि छात्रों के हिस्से में 20 प्रतिशत पदक आए। अन्य विन्यासीकृत पदकों में भी 46 में से 37 पदक छात्राओं ने हासिल किए। राज्यपाल ने छात्राओं के इस प्रदर्शन की सराहना की, हालांकि उच्च शिक्षा में संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
विकास परियोजनाओं का लोकार्पण

समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने ‘वॉल ऑफ फेम’, नारायण बाग स्थित पॉली हाउस और फूड टेक्नोलॉजी भवन के विस्तारीकरण कार्य का शुभारंभ किया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों की उपाधियों और अंकतालिकाओं को डिजीलॉकर पर अपलोड किया तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण ट्यूटर ‘द्रोणा’ का शुभारंभ किया।


उन्होंने छात्र-छात्राओं की प्रदर्शनी, स्टार्टअप और कला स्टॉलों का अवलोकन कर नवाचारों की सराहना की। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों, शिक्षकों और 10 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सम्मानित किया गया। एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों को भी प्रमाण पत्र दिए गए। इस दौरान विश्वविद्यालय की कई अकादमिक एवं शोध पत्रिकाओं का विमोचन भी हुआ।

समारोह में राजस्थान के भीलवाड़ा के प्रसिद्ध पिछवाई चित्रकार दिनेश सोनी को कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने वीरभूमि झांसी में यह सम्मान प्राप्त करने पर स्वयं को गौरवान्वित बताया। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और विशिष्ट अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।
उपलब्धियों की तारीफ, कमियों पर सीधा सवाल
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का श्रेय कुलपति, शिक्षकों और कर्मचारियों को देते हुए कहा कि विद्यार्थियों का प्रदर्शन सराहनीय है। साथ ही उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी कमियां भी महत्वपूर्ण होती हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन को उन पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि समता गर्ल्स हॉस्टल में खाना तैयार कर अन्य पांच छात्रावासों में भेजा जाता है। विद्यार्थियों से खाने की गुणवत्ता को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिलने का हवाला देते हुए उन्होंने कुलपति से कहा कि भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। मंच से ही उन्होंने सवाल किया—“सुधरोगे?” इस पर कुलपति अपनी सीट से खड़े हुए और व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की वाई-फाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद रेंज की समस्या के कारण सभी विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कुलपति से वाई-फाई की रेंज की समस्या दूर करने को कहा।
बिजली, सफाई और कबाड़ पर भी नाराजगी
राज्यपाल ने परिसर में बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि बिजली की समस्या है और जनरेटर भी उपलब्ध है, लेकिन जरूरत के समय वह नहीं चलता। उन्होंने इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
परिसर में सफाई व्यवस्था और विभिन्न विभागों के आसपास जमा कबाड़ पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नए भवनों का निर्माण हो रहा है, लेकिन पुराने भवनों और परिसर में जमा कबाड़ का भी निस्तारण किया जाना चाहिए। नए भवन बनने के बाद पुराने भवनों का क्या उपयोग होगा, इसकी योजना भी पहले से तैयार होनी चाहिए।
परिसर में सफाई व्यवस्था और विभिन्न विभागों के आसपास जमा कबाड़ पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नए भवनों का निर्माण हो रहा है, लेकिन पुराने भवनों और परिसर में जमा कबाड़ का भी निस्तारण किया जाना चाहिए। नए भवन बनने के बाद पुराने भवनों का क्या उपयोग होगा, इसकी योजना भी पहले से तैयार होनी चाहिए।
लिफ्ट की सुविधा विद्यार्थियों को देने की हिदायत
आर्किटेक्चर विभाग में लिफ्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को उसके इस्तेमाल की अनुमति न दिए जाने पर भी राज्यपाल ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि कोई सुविधा उपलब्ध है तो उसका लाभ विद्यार्थियों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे तल तक लिफ्ट का इस्तेमाल न भी कराया जाए, लेकिन तीसरे और चौथे तल पर जाने वाले विद्यार्थियों को इसकी सुविधा मिलनी चाहिए।
“उपाधि के साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ी”
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने के साथ उनकी राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने युवाओं को अंधविश्वास से दूर रहने और दूसरों को भी इससे बचाने की अपील की। साथ ही विद्यार्थियों को लगातार सीखते और खुद को उन्नत करते रहने की सलाह दी।
उन्होंने विश्वविद्यालय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, विदेशी विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाने और परिसर में नवाचार को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों की उन्होंने सराहना की।
“रानी लक्ष्मीबाई की धरती से हैं, पीछे मत हटो”
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ने पर प्रसन्नता जताते हुए राज्यपाल ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वे वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती से हैं। उन्होंने छात्राओं को निर्भीक होकर आगे बढ़ने और परेशानियों से घबराने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करने की सीख दी।
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन
