केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय

समय पर नर्सरी तैयार कर किसान बढ़ाएं हरी मिर्च की पैदावार

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झांसी। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय  के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसानों को हरी मिर्च की उन्नत खेती के लिए समय पर नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह से मई के प्रथम पखवाड़े तक नर्सरी तैयार करना सबसे उपयुक्त समय होता है।केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय

उन्होंने कहा कि इस दौरान गर्मी के कारण वातावरण में नमी कम रहती है, जिससे फफूंदी जनित रोगों का खतरा घटता है और स्वस्थ पौध तैयार होती है।

डॉ. सिंह के अनुसार प्रति एकड़ 80–100 ग्राम हाइब्रिड (शंकर) बीज पर्याप्त होता है जबकि स्वयं परागित किस्मों के लिए 150–200 ग्राम बीज की जरूरत होती हैनर्सरी बेड 3 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा और 8–10 सेमी ऊंचा बनाना चाहिएमिट्टी को भुरभुरी बनाकर उसमें सड़ी हुई गोबर खाद मिलाना जरूरी हैबीजों की बुवाई 2–3 सेमी गहराई पर करें, इससे बेहतर अंकुरण होता है

उन्नत किस्में

ग्रीष्मकालीन नर्सरी के लिए पूसा ज्वाला, आर्का हरिता, लालिमा, एन.एस. 1701 और रामकृष्ण-51 प्रमुख किस्में बताई गई हैं। नर्सरी के पौधे लगभग 25–30 दिन में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।

रोपाई और सिंचाई प्रबंधन

रोपाई मेड़ बनाकर करना लाभकारी रहता है
जून में रोपाई करने पर जुलाई के प्रारंभ में पहली तुड़ाई संभव
मेड़ से मेड़ दूरी 75 सेमी और पौधे से पौधे दूरी 45 सेमी रखें
बरसात शुरू होने तक साप्ताहिक सिंचाई जरूरीकेंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय

रोग और कीट नियंत्रण

मिर्च की फसल में रसचूषक कीट प्रमुख समस्या है, जिससे पत्तियों में सिकुड़न रोग होता है। इसके नियंत्रण के लिए फूल आने की अवस्था में इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 250 मिलीलीटर मात्रा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

बेहतर उत्पादन और मुनाफा
विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित उर्वरक, सिंचाई, कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने पर किसान प्रति एकड़ 100–120 कुंतल तक उत्पादन ले सकते हैं। इससे लगभग 1 लाख से 1.25 लाख रुपये प्रति एकड़ तक लाभ कमाया जा सकता है।
समय पर नर्सरी तैयार कर वैज्ञानिक तरीके से खेती अपनाने पर किसान हरी मिर्च की फसल से अच्छा उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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