झांसी। लोक निर्माण विभाग ( पीडब्ल्यूडी) में एक बड़े घोटाले के आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामनगर–एरच–बेंदा मार्ग के निर्माण के लिए करीब 28.50 करोड़ रुपये की परियोजना इन दिनों विवादों में घिरी हुई है।

आरोप है कि इस सड़क निर्माण के टेंडर में रात के समय बैक-डेट में धांधली की गई। ठेकेदारों का कहना है कि कार्यालय समय समाप्त होने के बाद “चोरी-छिपे” टेंडर प्रक्रिया चलाई गई। जब ठेकेदारों को इसकी जानकारी हुई और वे अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचे, तो वहां हड़कंप मच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अधीक्षण अभियंता संजीव कथित रूप से पीछे के गेट से निकल गए, जबकि कुछ कर्मचारी फाइलें लेकर बाहर जाते नजर आए। इस दौरान फोन पर भी अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
एक महिला ठेकेदार ने खुलकर आरोप लगाया कि विभाग ने अपने “चहेते” ठेकेदारों को फुल रेट पर काम देने के लिए पूरी प्रक्रिया में हेरफेर की। ठेकेदारों का कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत से निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को दरकिनार किया गया।
मामला अब न्यायालय पहुंच चुका है। प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन कंपनी की याचिका पर हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई ) जारी करने पर भी पाबंदी लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 13 अप्रैल को तय की है।
इस घटनाक्रम ने पीडब्ल्यूडीकी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस कथित घोटाले से जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
