झांसी। महानगर स्थित वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पार्क में स्थापना के लिए सोमवार को पहुंची रानी लक्ष्मीबाई की सिंहासनारूढ़ प्रतिमा को पार्क कर्मचारियों ने भीतर प्रवेश करने से रोक दिया और पार्क के सभी गेटों पर ताले जड़ दिए ।
इसके बाद इस प्रतिमा के निर्माण और वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पार्क में स्थापना के लिये करीब आठ महीने से अथक प्रयास कर रही कर्म योगी संस्था के सदस्यों ने पार्क के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन किया । रानी झांसी की प्रतिमा को उनकी ही धरती पर रानी के ही नाम पर बने पार्क में प्रवेश न मिलने से उद्वेलित संस्था के लोग पार्क के बाहर धरने पर बैठ गए ।

श्री कर्मयोगी संस्था अध्यक्ष संतोष कुमार गौड़ ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई की सिंहासनारूढ़ प्रतिमा की स्थापना के लिए संस्था के पास जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों की आख्या के साथ ही शासन द्वारा नियमानुसार अनुमति प्रदान की गयी है। शासन की अनुमति प्राप्त होते ही नियमानुसार जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर आयुक्त सहित संबंधित थाने, चौकी व अन्य विभागों को सूचित करने और सहमति होने पर ही संस्था के पदाधिकारी सोमवार को निर्धारित समय पर प्रातः 11 बजे रानी लक्ष्मीबाई पार्क पहुंचे, जहां थाना नवाबाद और दुर्ग चौकी पुलिस की मौजूदगी में शाम तक जद्दोजहद के बाद भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका।
इस बीच प्रतिमा स्थापना के लिए दृढ़ संकल्पित कर्म योगी संस्था के पदाधिकारी महारानी की प्रतिमा को साथ लेकर सुबह से देर शाम तक पार्क में डटे रहे लेकिन वजह बताने वाला कोई नहीं था कि आखिर किसके इशारे पर पार्क का द्वार नहीं खोला गया और झांसी की आन बान शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाली वीरांगना की प्रतिमा लोडिंग वाहन में देर शाम तक अपनी ही नगरी में पार्क के अंदर प्रवेश की बाट जोहती रही ।
संस्था के पदाधिकारियों की मानें तो एक पार्षद की अनुचित मांग पूरी नहीं होने के कारण वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की सिंहासन पर विराजमान प्रतिमा स्थापित करने में व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि इस तरह की सोच और कृत्य के लिए नगर निगम के ऐसे जनप्रतिनिधि को जनता कभी माफ कर सकेगी।
संस्था के अनुसार संपूर्ण विश्व में सिंहासन पर विराजमान महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा नहीं है और स्थापना के बाद पार्क की जो सुन्दरता निखर कर सामने आएगी वह अत्यंत ही दर्शनीय होगी।
दिन भर पार्क में चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी आते और जाते रहे लेकिन मूर्ति गेट से भीतर नहीं आ पायी ।
इस बीच मीडिया में सरगर्मियां बढ़ने के बाद शाम करीब सात बजे महापौर बिहारी लाल आर्य, अपर जिला मजिस्ट्रेट और नगर मजिस्ट्रेट आदि ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को पार्क में रखवाया । हालाँकि अभी प्रतिमा के स्थापना स्थल को लेकर पसोपेश बना हुआ है लेकिन महापौर के आने बाद प्रतिमा को आखिर पार्क में प्रवेश देकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया गया है।
