झांसी। जनपद में डीजल/पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर की आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट करते हुए जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कम्पनियों द्वारा कार्यरत 176 पेट्रोल पम्प एवं 54 गैस एजेन्सियों के माध्यम से सुचारू रूप से डीजल/पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा रही है। वर्तमान में जनपद में डीजल/पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर के मांग के सापेक्ष आपूर्ति में कोई समस्या या रूकावट नहीं है।

उपभोक्ताओं डीजल/पेट्रोल की आपूर्ति तथा गैस सिलण्डेर की आपूर्ति 25 दिन के बाद डीएसी (ऑथेंटिकेशन कोड) के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है, जिससे गैस सिलेण्डर की आपूर्ति वास्तविक उपभोक्ताओं को ही की जाए, जिससे डायवर्जन/कालाबाजारी को रोका जा सके।
जिलाधिकारी निर्देश दिए कि सभी उपजिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत स्वयं एवं अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट, पुलिस क्षेत्राधिकारी/थाना प्रभारी, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक के साथ निरंतर रूप से भ्रमणशील रहकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं पर भी डीजल / पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर का अनाधिकृत रूप भण्डारण / डायवर्जन / कालाबाजारी न हो।
यह भी सुनिश्चित करें कि किसी भी पेट्रोल पम्प एवं गैस एजेन्सी द्वारा किसी भी उपभोक्ता से डीजल/पेट्रोल एवं गैस की निर्धारित मूल्य से अधिक धनराशि न ली जाए। कुछ जनसेवा केन्द्रों द्वारा भी घरेलू गैस सिलेण्डरों की आपूर्ति की जाती है, इस पर भी कडी नजर रखी जाए।
सोशल मीडिया/व्यक्तियों आदि द्वारा डीजल / पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर की कमी सम्बन्धित झूठा एवं भ्रामक दुष्प्रचार किए जाने की सम्भावना पर भी कड़ी नजर रखी जाए। यदि कोई भी व्यक्ति / सोशल मीडिया एकाउन्ट आदि इसमें संलिप्त पाए जाए तो उसके विरूद्ध कठोर दण्डात्मक एवं विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करायी जाए।
सभी पेट्रोल पम्प एवं गैस एजेन्सियों के बाहर बैनर / फलैक्सी लगाकर सुनिश्चित कराया जाए कि डीजल/पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है एवं उपभोक्ताओं को आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार उनको डीजल/पेट्रोल एवं गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
यदि कोई भी व्यक्ति पेट्रोल पम्प, गैस एजेन्सी, प्रतिष्ठान आदि डीजल, पेट्रोल एवं घरेलू गैस सिलेण्डर के किसी भी प्रकार के अनाधिकृत होल्डिंग, भण्डारण, डायवर्जन, कालाबाजारी, ओवररेटिंग डिलीवरी आदि में संलिप्त पाया जाए तो सभी सम्बन्धित के विरूद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 एवं भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज कराते हुए कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
