झांसी कृषि विश्वविद्यालय

झांसी कृषि विश्वविद्यालय में बागवानी पर राष्ट्रीय सह -अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

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झांसी । बुंदेलखंड के झांसी स्थित  रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आज चतुर्थ  राष्ट्रीय सह -अंतरराष्ट्रीय उद्यानिकी शिखर सम्मेलन- 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ।

झांसी कृषि विश्वविद्यालय तीन दिवसीय सम्मेलन 28 से 30 जनवरी के बीच “सतत विकास, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता हेतु स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों का संवर्धन” विषय पर बागवानी अनुंसधान एवं विकास समिति उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर किया जा रहा है।झांसी कृषि विश्वविद्यालय

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि  कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  डॉ. पंजाब सिंह ने सब्जी क्षेत्र के समग्र विकास पर विशेष जोर हुए कहा कि सब्जी फसलें उच्च उत्पादकता, कम अवधि में अधिक उत्पादन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन की क्षमता के कारण छोटे और सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलें न केवल पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि इनमें निहित औषधीय एवं स्वास्थ्यवर्धक गुण जनस्वास्थ्य सुधार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे  कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। फल, सब्जी के साथ-साथ मसाला वर्गीय फसलें (जैसे धनिया, जीरा, सौंफ, मेथी, हल्दी, अदरक आदि) क्षेत्र की जलवायु एवं मृदा परिस्थितियों के अनुरूप होने के कारण किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। इन फसलों में प्रजातीय विविधता तथा कम लागत में अधिक मूल्य प्राप्त करने की व्यापक संभावना है।
बहुविषयक अनुसंधान, किसान-केन्द्रित तकनीकों, गुणवत्ता बीज एवं रोपण सामग्री, तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उद्यानिकी और मसाला फसल क्षेत्र को नई दिशा दी जा सकती है, जिससे बुंदेलखंड सहित देश के छोटे एवं सीमांत किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी।

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उद्यानिकी आयुक्त, भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि भारतीय उद्यानिकी क्षेत्र में नेट निर्यात की अपार संभावनाएँ हैं, बशर्ते उत्पादन में गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित की जाए।  उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और विपणन तक एकीकृत व्यवस्था ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकती है। उन्होंने निर्यात उन्मुख उद्यानिकी के लिए मानकीकरण, ट्रेसबिलिटी और किसानद_-उद्यमी सहभागिता को भी महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय कृषि एवं बागवानी अनुसंधान विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. बलराज सिंह ने उद्यानिकी अनुसंधान एवं विकास को सशक्त करने में इस प्रकार के सम्मेलनों की भूमिका पर प्रकाश डाला ।

भारतीय कृषि एवं बागवानी अनुसंधान विकास समिति के उपाध्यक्ष डॉ. बी.एस. तोमर ने क्षमता निर्माण और तकनीक प्रसार की आवश्यकता पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

पूर्व कुलपति डॉ. वाई.एस.आर. उद्यानिकी विश्वविद्यालय आन्ध्र प्रदेश डॉ. टी जनकीराम , ने कहा कि जामुन, करौंदा एवं मोरिंगा (सहजन) जैसी स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित फल एवं सब्जी फसलों पर विशेष प्रकाश डाला।ये फसलें पोषण, औषधीय गुणों तथा जलवायु सहनशीलता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, किंतु अभी तक इनका समुचित व्यावसायीकरण नहीं हो पाया है।

आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने सब्जी उत्पादन में गुणवत्तायुक्त बीज तथा मृदा में गुणवत्तायुक्त लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका को रेखांकित किया।

निदेशक आई.जी.एफ.आर.आई. झाँसी डॉ. पंकज कौशल ने अपने संबोधन में कहा कि घास की उपयोगिता बताते हुए विस्तृत जानकारी दी।

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डॉ. मनीष श्रीवास्तव, स्थानीय आयोजन सचिव एवं अधिष्ठाता, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन कहा कियह मंच  वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान-विनिमय, नवाचार और सहयोग को सशक्त करेगा तथा स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों को सतत विकास से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।यह मंच  वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान-विनिमय, नवाचार और सहयोग को सशक्त करेगा तथा स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों को सतत विकास से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

डॉ. प्रभात तिवारी द्वारा लिखित चार  पुस्तकों  – कृषि वानिकी में वृक्ष विविधता, अर्द्धशुष्क  क्षेत्रों हेतु प्रजातियां, औद्योगिक कृषि वानिकी की संभावनाओं पर सफलता गाथा, बुंदेलखण्ड क्षेत्र में कृषि वानिकी एवं वृक्षारोपण  हेतु उच्च तकनीक नर्सरी की स्थापना पर सफलता गाथा, राम वन जैव विविधता, अनुसंधान एवं संस्कृति का संक्षिप्त परिचय सहित  विभिन्न महत्त्वपूर्ण प्रकाशनों एवं पुस्तकों का विमोचन किया गया ।

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बागवानी विज्ञान में अनुसंधान और विकास के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार डॉ. उमाकांत दुबे नई दिल्ली को ,बागवानी अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए लीडरशिप अवार्ड 2025 – कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह को तथा 2024 उद्यानिकी कमिशनर भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार एवं डॉ. वी.एस. तोमर, नई दिल्ली को ,डॉ. कीर्ति सिंह मेमोरियल अवार्ड सब्जी विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सी इन्दुरानी, तमिलनाडु और डॉ. आरके सिंह, मेरठ को,डॉ. गौतम कल्लू उत्कृष्टता बागवानी अनुसंधान पुरस्कार बागवानी के क्षेत्र में डॉ. राजेष कुमार निदेशक आईआईवीआर वाराणसी को ,मानद फेलो पुरूस्कार डॉ. दिलफूजा जब्बोरोवा उजबेकिस्तान, डॉ. केके उपाध्याय, डॉ. बीके सिंह, डॉ. एसआर सिंह को ,सरोज सिंह मेमोरियल एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड्स अपूर्वा त्रिपाठी और मनसुख पटेल को दिया गया।

चौधरी गंगासरन त्यागी मेमोरियल बेस्ट प्रगतिशील किसान/उद्यम पुरस्कार डॉ. कमलजीत जलंधर और शिवकरन बीकानेर राजस्थान को मिला।

इस अवसर पर विवि के सभी वरिष्ठ अधिकारी, सह आयोजन सचिव डॉ. मनमोहन डोबरियाल, डॉ. गौरव शर्मा, डॉ. आर के सिंह, अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं नीति-निर्माता, शोधार्थी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अर्तिका सिंह एवं सभी लोगों का आभार डॉ. सोम दत्त ने व्यक्त किया।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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