झांसी।एक सरकारी कार्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया, जब एक कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक प्रताड़ना, कार्रवाई की धमकी और अत्यधिक कार्यभार देकर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं संबंधित अधिकारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें तथ्यहीन बताया है।
कर्मचारी विजय कुमार का आरोप है कि एक पूर्व कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल में लगी आपत्तियों की जानकारी देने के दौरान संयुक्त विकास आयुक्त सुरेश चंद्र केसरवानी उनसे नाराज हो गए। उनका कहना है कि अधिकारी ने बातचीत के दौरान निलंबन की धमकी दी, जिससे वह मानसिक रूप से तनावग्रस्त हो गए। तनाव के कारण उनका रक्तचाप अचानक बढ़ गया और चक्कर आने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

विजय कुमार ने यह भी कहा कि कार्यालय में लगातार अधिक कार्यभार और अधिकारियों के व्यवहार के कारण वह लंबे समय से मानसिक दबाव में थे। उन्होंने मांग की है कि उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए तथा उनके कार्य का बोझ कम किया जाए, ताकि अनावश्यक मानसिक तनाव से राहत मिल सके।
दूसरी ओर, संबंधित अधिकारी सुरेश चंद्र केसरवानी ने कर्मचारी के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल में कुछ आपत्तियां दर्ज थीं । कर्मचारी द्वारा संबंधित व्यक्ति को व्हाट्सएप पर सूचना भेजे जाने की जानकारी मिलने पर केवल स्पष्टीकरण मांगा गया था। उनका दावा है कि बातचीत के दौरान किसी प्रकार की अभद्रता या धमकी नहीं दी गई।
अधिकारी ने यह भी बताया कि कर्मचारी पहले से उपचाराधीन थे। उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही विभाग की ओर से तत्काल वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विजय कुमार के पास सीमित कार्यालयी कार्य है और अत्यधिक कार्यभार दिए जाने का आरोप सही नहीं है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
