बीयू में स्वामी विवेकानन्द जयंती

बीयू में मनायी गयी स्वामी विवेकानन्द 160वीं जयंती

झांसी 12 जनवरी। झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) में आज वेदांत के जाने माने और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की 160 जयंती पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय  के पैनोरमा थिएटर क्लब के तत्तवावधान में गांधी सभागार में ‘‘स्वामी विवेकानंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित नाट्य प्रतियोगिता’’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो. सुनील काबिया ने कहा ‘‘स्वामी विवेकानन्द एक अध्यात्मवादी और महान सृजनात्मक विभूति थे। भारत के नैतिक और सामाजिक पुनरुत्थान के लिए उन्होंनें एक अनुप्रेरित कार्यकर्ता के रुप में अपना सम्पूर्ण जीवन समाप्त किया। वे भारत में राष्ट्रवाद के पुरोधा माने जाते हैं।’’

बीयू में स्वामी विवेकानन्द जयंती

उन्होनें कहा कि जिस समय राष्ट्र उदासीनता, निष्क्रियता और निराशा में डूबा हुआ था, उस समय स्वामी विवेकानन्द ने भारत के राष्ट्रवाद की नैतिक नींव को सिद्धान्त तथा व्यवहार दोनों ही दृष्टि से सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भारतीय संस्कृति के गहन विवेचक और महान दार्शनिक थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी संभवतः ऐसे अकेले आध्यात्मिक महापुरुष हैं, जो यह स्वीकार करते हैं कि परम्परा और आधुनिकता के बीच तालमेल संभव है। वे मानते थे कि राष्ट्र झोपडियांे में बसता है। उन्होंनें कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतवर्ष की दरिद्रता, अशिक्षा और सामाजिक विसंगतियों के विरुद्ध अपने विचारों के माध्यम से लडाई लडी।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए समाज कार्य विभाग के सह आचार्य डाॅ. यतीन्द्र मिश्रा ने कहा कि स्वामी विवेकान्द जी का सर्वाधिक महत्व इस बात को लेकर है कि वे जीवन भर स्त्री मुक्ति, दलितोद्धार, अछूतोद्धार, गरीब, शोषित, पीड़ित जनता के हित के लिए विचार करते रहे तथा उनकी स्थितियों में सुधार के लिए प्रयत्न करते रहे। पत्रकारिता संस्थान के शिक्षक उमेश शुक्ला ने कहा कि स्वामी जी के जीवन चरित्र को यदि हम देखते हैं तो हम पाते हैं कि वे न केवल प्रखर वक्ता, विद्वान थे, बल्कि वे भविष्यदृष्टा भी थे। वहीं सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. मुहम्मद नईम ने स्वामी विवेकानन्द जी को सामाजिक चिन्तक, कुशल सामाजिक कार्यकर्ता, सहजकर्ता, सन्दर्भदाता और सामाजिक अभियन्त्रक बताया। इस अवसर पर डाॅ. जय सिंह, डाॅ. सुनीता ने भी विचार रखे।

स्वामी विवेकानन्द जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आयोजित नाट्य प्रतियोगिता में बायोमेडिकल विभाग के टीम प्रथम स्थान पर रही, जिसमें मीजान अली, स्वाती पाण्डेय, अनस, अमित कुमार गुप्ता, आदिल खान, मानसी पटेल, कनक गुप्ता, अजीत, लकी सोनी, रीतेश दीक्षित शामिल रहे, वहीं द्वितीय स्थान पर सोशल वर्क विभाग की टीम रही, जिसमें आरोही पाण्डेय, अनन्या, आयुषी पाराशर, समय, मुकुल कुशवाहा, तरल राय प्रतिभागी रहे।

कार्यक्रम का संचालन पैनोरमा थिएटर क्लब के संयोजक डाॅ. मुहम्मद नईम ने, स्वागत डाॅ. नेहा मिश्रा ने व आभार डाॅ. साक्षी दुबे ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डाॅ. कौशल त्रिपाठी, डाॅ. संतोष पाण्डेय, डाॅ. संजय गुगरी, डाॅ. अजय कुमार गुप्ता, सौरभ सविता, निखिल पटेल, फराज शेख, राज सिंह राजावत, लव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

वैभव सिंह

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