झांसी। बुंदेलखंड में 22 जून से अब तक हुई बारिश दलहन और तिलहन की फसलों के लिए काफी अनुकूल रही है। धीमी गति से हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी, लेकिन अब तक जलभराव की स्थिति नहीं बनी।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह ने ” बुंदेलखंड कनेक्शन”” के साथ विशेष बातचीत में बताया कि बुंदेलखंड में अब तक करीब 450 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में इसके बढ़कर करीब 550 मिलीमीटर तक पहुंचने की संभावना है।
डॉ. सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड में मानसूनी बारिश का सामान्य दौर 22 जून से 22 सितंबर तक माना जाता है। क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा करीब 850 मिलीमीटर है। इस बार अब तक बारिश भले ही सामान्य वर्षों की तुलना में कम रही हो, लेकिन धीमी रफ़्तार से हुई बारिश फसलों और भूमिगत जल के लिए लाभकारी रही है।
मूंगफली, तिल, उड़द और मूंग को मिला फायदा
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, बुंदेलखंड में मूंगफली, तिल, उड़द और मूंग जैसी दलहन-तिलहन फसलों को अब तक हुई बारिश से अच्छा फायदा मिला है। धीमी बारिश के कारण मिट्टी में नमी बनी रही और पानी खेतों में लंबे समय तक ठहरा नहीं। इससे फसलों की बढ़वार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।
उन्होंने बताया कि झांसी सहित बुंदेलखंड क्षेत्र में धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों की तुलना में दलहन और तिलहन फसलें अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं। इस लिहाज से इस बार की बारिश किसानों के लिए राहत देने वाली रही है।
आगे बारिश बढ़ी तो जलभराव से फसलों को नुकसान
डॉ. सिंह ने किसानों को अगले तीन-चार दिनों में संभावित बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अब तक हुई बारिश फसलों के लिए बेहद अच्छी रही है, लेकिन यदि आगे लगातार या तेज बारिश होती है तो खेतों में जलभराव हो सकता है। जलभराव से दलहन और तिलहन फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें और मेड़ों को मजबूत रखें।
‘खेत का पानी खेत में’ रखने पर जोर
मौसम वैज्ञानिक ने बारिश के पानी को संरक्षित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में तेज बारिश होने पर पानी तेजी से बहकर नदियों में पहुंच जाता है। इससे बारिश के पानी का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। किसानों को प्रयास करना चाहिए कि ‘खेत का पानी खेत में और मेड़ का पानी मेड़ पर’ बना रहे।
उन्होंने खेत तालाब योजना को बुंदेलखंड के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि खेतों में बारिश का पानी एकत्र करने से सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकता है। साथ ही इससे भूमिगत जल के रिचार्ज में भी मदद मिलती है।
भूमिगत जलस्तर के लिए भी अच्छी बारिश
डॉ. सिंह के अनुसार, इस बार धीमी गति से हुई बारिश भूमिगत जलस्तर के रिचार्ज के लिहाज से भी बेहतर रही है। तेज बारिश में पानी बहकर निकल जाता है, जबकि धीमी बारिश मिट्टी को पानी सोखने का अधिक अवसर देती है। इससे आने वाले समय में क्षेत्र के जलस्रोतों और बोरवेल के जलस्तर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि आगामी बारिश को देखते हुए खेतों में जलभराव रोकने और बारिश के पानी को संरक्षित करने की व्यवस्था अभी से सुनिश्चित करें।
