झांसी। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने जिले के निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली, ड्रेस और किताबों की अनिवार्य खरीद व्यवस्था तथा अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर सख्त रुख अपनाया है।

जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों को उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 एवं संशोधन अधिनियम-2020 का हर हाल में पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालय संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सेवा और गुणवत्ता होना चाहिए, लेकिन कुछ विद्यालय शिक्षा के व्यवसायीकरण की ओर बढ़ रहे हैं। प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क और वार्षिक शुल्क के नाम पर की जा रही मनमानी अब प्रशासन की निगरानी में रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी विद्यालय छात्रों और अभिभावकों को यूनिफॉर्म, किताबें या स्टेशनरी किसी एक निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालय फीस, यूनिफॉर्म और अनिवार्य पुस्तकों की सूची उनकी कीमतों सहित विद्यालय की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करें। साथ ही अभिभावकों को भी पारदर्शी तरीके से पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
पुरानी किताबों के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में एक सकारात्मक पहल करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यदि छात्र अपने बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों का उपयोग करना चाहते हैं तो विद्यालय उन्हें रोकेंगे नहीं, बल्कि इसके लिए प्रोत्साहित करेंगे। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा।
यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर रोक
विद्यालयों द्वारा हर साल यूनिफॉर्म बदलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी विद्यालय को पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म बदलने की अनुमति नहीं होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि अनावश्यक बदलाव से अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
स्कूल बसों में सीसीटीवी और मेडिकल किट अनिवार्य
छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों को रोड सेफ्टी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संचालित स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे, मेडिकल किट और अन्य सुरक्षा संसाधन अनिवार्य रूप से मौजूद होने चाहिए। नियमों के पालन पर प्रशासन की नजर रहेगी।
आरटीई के तहत बच्चों से भेदभाव नहीं
बैठक में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
वेद उच्चारण में विश्व कीर्तिमान पर छात्र सम्मानित
बैठक से पहले जय अकैडमी के छात्र श्रेष्ठ भार्गव को वेद उच्चारण में विश्व कीर्तिमान स्थापित करने पर जिलाधिकारी द्वारा प्रमाण-पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया।
बैठक का संचालन जिला विद्यालय निरीक्षक रती वर्मा ने किया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा विजय शर्मा सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।
प्रमुख फैसले
- मनमानी फीस वसूली पर प्रशासन की सख्त निगरानी
- तय दुकान से ड्रेस-किताब खरीदने की अनिवार्यता खत्म
पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदली जाएगी - फीस और किताबों की सूची सार्वजनिक करना अनिवार्य
- स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे और मेडिकल किट जरूरी
- आरटीई के तहत बच्चों से भेदभाव पर होगी कार्रवाई
- नियम तोड़ने वाले विद्यालयों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
