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पराली जलाये जाने को लेकर झांसी प्रशासन हुआ सख्त

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झांसी 24 सितंबर । झांसी जिला प्रशासन ने पराली जलाएं जाने को लेकर कड़ा रूख अपनाते हुए आज साफ किया कि इस साल किसी भी जगह पर पराली नहीं जलाने दी जायेगी। यदि ऐसा हुआ तो किसानों से पूरा हर्जाना वसूला जायेगा।

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि पर्यावरण विभाग के आदेशानुसार पराली जलाएं जाने पर क्षतिपूर्ति वसूली जायेगी। दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500, दो- पांच एकड के लिए पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 15 हजार रूपये पर्यावरण हर्जाना वसूला जोगा। यदि आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो पुर्नावृत्ति पर कारावास और अर्थदंड की कार्रवाई भी की जायेगी।

गांवों में प्रधान मुनादी कर यह जानकारी देंगे। इतना ही नहीं  ऐसा करने वाले किसानों को कृषि विभाग के द्वारा विभिन्न छोटे-बड़े सभी प्रकार के कृषि यन्त्र, बीज, खाद, कीटनाशक के साथ ही प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि के दिये जाने वाले लाभ से वंचित कर दिया जायेगा।

उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को भी उनके क्षेत्र में पराली जलाए जाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के निर्देश दिये।  धान की कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मेनेजमेन्ट सिस्टम लगाये जाने अथवा कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबन्धन के यन्त्रों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर मल्चर, रोटरी स्लेशर श्रेडर, अब मास्टर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, जीरोटिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, बेलर, स्ट्रा रेक, काप रीपर, रीपर कम बाइण्डर, सुपर स्ट्रा मेनेजमेन्ट सिस्टम एवं स्मार्ट सीडर एवं अन्य कार्यों जैसे- पशु चारा, कम्पोस्ट खाद बनाने, बायो कोल, बायोफ्यूल एवं सी०बी०जी० आदि में उपयोग किये जाने हेतु प्रेरित किया जाये।

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि खेतों में फसल अवशेष को शीघ्रता से सडाने हेतु पानी भरकर यूरिया का छिड़काव भी किया जा सकता हैं।धान की पराली का इन / सीटू प्रबन्धन कर कृषकों को खेत में तथा सामुदायिक तौर पर कम्पोस्ट बनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाए। जनपद में इस वर्ष 60 हज़ार डिकम्पोजर कृषकों को निःशुल्क वितरित करना प्रस्तावित है जिसमें डिकम्पोजर की एक बोतल / कैप्सूल पेक एक एकड़ क्षेत्र हेतु पर्याप्त होती है। उक्त खाद की उपयोग से किसानों की उत्पादकता और उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी।

वैभव सिंह

बुंदेलखंड कनेक्शन

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