झांसी । महानगर के कुंजबिहारी मंदिर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस पर कथा व्यास बुंदेलखंड धर्माचार्य राधामोहन दास महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के महारास और भक्ति का महत्व बताया। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
ग्वालियर रोड स्थित मंदिर में कथा व्यास राधामोहन दास महाराज ने कहा कि परमात्मा को सरल और निर्मल स्वभाव के लोग प्रिय होते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “निर्मल मन मोहि सोई जन पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा” का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान से सच्चा प्रेम करने वाले व्यक्ति सदैव सुखी रहते हैं। यदि मनुष्य परमात्मा के चरणों में अनुराग रखे तो ईश्वर उसके जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान से प्रेम करने वालों का बाहरी और भीतरी शत्रु कुछ नहीं बिगाड़ सकते। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार व्यक्ति को परमात्मा से दूर कर देते हैं। महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गोपी कोई स्त्री या पुरुष नहीं, बल्कि प्रभु प्रेम में स्वयं को भुला देने की अवस्था है।
राधामोहन दास महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के महारास में भगवान शंकर मां पार्वती के साथ गोपी रूप में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के बिना परमात्मा के महारास में प्रवेश संभव नहीं है। भगवान को पाने के लिए यदि स्वयं का स्वरूप भी बदलना पड़े तो बदल लेना चाहिए।
कथा के दौरान गोपी-उद्धव संवाद, कंस वध और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। “आओ री सखियां हमको सजाओ, हमें श्याम सुंदर की दुल्हन बनाओ” भजन पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य रामलखन उपाध्याय द्वारा श्रीगणेश पूजन, ग्रंथ पूजन और व्यासपीठ पूजन से हुई। इसके बाद मुख्य यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत पुराण की आरती उतारी। अंत में व्यवस्थापक पवनदास ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
