रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय

कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को दी गुणवत्तायुक्त बीज के भण्डारण की सलाह

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झांसी । बुंदेलखंड के झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की  वैज्ञानिकों  डॉ. गुंजन गुलेरिया और डॉ. ऊषा ने किसानों को कटाई  के बाद गुणवत्तायुक्त बीज हेतु भण्डारण की सलाह दी है।

उन्होंने बताया कि किसानों की  रबी फसलों (चना, मटर, मसूर, सरसों, जौ व अलसी) की कटाई पूरी हो चुकी है तथा 40 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रफल में गेहूँ की कटाई हो चुकी है। इन फसलों का गुणवत्ता बीज के लिए उचित भंडारण करना बहुत आवश्यक होता है ताकि बीज लंबे समय तक सुरक्षित रहे और खराब न हो।

कटाई के बाद सबसे पहले फसल को अच्छी तरह धूप में सुखाना चाहिए, जिससे उसमें मौजूद नमीं पूरी तरह निकल जाए। सामान्यतः गेहूं और जौ को 3-4 दिन, चना को 4-5 दिन और सरसों को 2-3 दिन तक तेज धूप में सुखाना चाहिए, ताकि नमीं का स्तर लगभग 10-12 प्रतिशत से कम हो जाए। लंबे समय के भंडारण के लिए नमी 12 प्रतिशत से कम रखना आवश्यक है, जबकि कम समय के लिए 12-14 प्रतिशत तक नमीं पर्याप्त होती है।

यदि बीज में अधिक नमीं रह जाती है तो उसमें फफूंदी और कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है और लगभग 10 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। इसके बाद बीज को अच्छी तरह साफ करना चाहिए, जिसमें मिट्टी, कंकड़, भूसा और अन्य अशुद्धियाँ निकाल दी जाती हैं। भंडारण के लिए सूखी, ठंडी और हवादार जगह का चयन करना चाहिए। भंडार गृह में जमीन से 20-25 सेंटीमीटर ऊँचाई पर लकड़ी का प्लेटफॉर्म बनाकर बोरियों को रखना चाहिए, ताकि नमीं से बचाव हो सके। भंडारण के लिए धातु या प्लास्टिक के एयरटाइट डिब्बों, बोरियों या टंकियों का उपयोग करना बेहतर होता है। बोरियों को उपयोग से पहले 1 प्रतिशत मैलाथियान के घोल में 3-4 मिनट तक डुबोकर धूप में सुखा लेना चाहिए।

कीट प्रबंधन के लिए अनाज में नीम की सूखी पत्तियाँ 2-3 किलोग्राम प्रति क्विंटल या नीम पाउडर 1-2 किलोग्राम प्रति क्विंटल मिलाने से कीटों का प्रकोप कम होता है। नीम का तेल 50-100 मिली प्रति क्विंटल की दर से उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा 8-10 सूखी लाल मिर्च या 250-300 ग्राम लहसुन प्रति क्विंटल रखने से भी कीट प्रबंधन में मदद मिलती है। सिलिका जेल का उपयोग नमी नियंत्रण के लिए किया जा सकता है, जिसमें लगभग 20-30 ग्राम सिलिका जेल प्रति 50 किलोग्राम अनाज के साथ पाउच में रखकर उपयोग किया जाता है।

अधिक कीट होने पर 5-7 दिनों के लिए 9 ग्राम प्रति मीट्रिक टन की दर से एलुमिनियम फॉस्फाइड द्वारा धूमन किया जा सकता है, लेकिन इसे सावधानीपूर्वक करना चाहिए। भंडारण के दौरान पुरवैया (नमी वाली) हवा चलने पर बीज को भण्डारित करने से बचना चाहिए। साथ ही अलग-अलग फसलों को अलग रखें और पुराने व नए बीज को मिलाने से बचें। गोदाम की नियमित सफाई करें। इस प्रकार भंडारण करने पर गुणवत्ता बीज अगले वर्ष बुवाई हेतु उपयुक्त होता है और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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