झांसी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जल सहेलियों के सम्मान एवं यमुना संरक्षण के संकल्प का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वृंदावन गार्डन सिमरावरी में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद सभी जल सहेलियों ने एक-दूसरे को महिला दिवस और होली की रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन सुलेखा जी ने किया। इस अवसर पर यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा में शामिल सभी जल सहेलियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर जल सहेली समिति के संस्थापक डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियों को संबोधित करते हुए कहा कि यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा ने एक नया इतिहास रचा है। त्याग और सत्य ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर जल सहेलियों ने 29 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में यात्रा कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि शांति, जागरूकता और नदी संरक्षण का सशक्त संदेश है।
कार्यक्रम में जल सहेली प्रभा देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों से आई महिलाएं एक परिवार की तरह बन गईं। इस यात्रा ने आपसी सहयोग, एकता और विश्वास को मजबूत किया। वे आगे भी समाज और नदी संरक्षण के लिए इसी तरह कंधे से कंधा मिलाकर काम करती रहेंगी।
जल सहेली मंजुलता ने बताया कि मथुरा से लेकर दिल्ली तक यमुना का जल काफी प्रदूषित हो चुका है, जिसे स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल सहेलियां इस मुहिम को आगे भी मजबूती के साथ जारी रखेंगी और लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
इसी श्रृंखला में जल सहेली जयंती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हम सबका दिन है। यह दिवस हमें अपने अधिकारों और संघर्षों की याद दिलाता है। महिलाओं की सशक्तता समाज में निरंतर बढ़ रही है, लेकिन अभी भी महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में अपेक्षित सफलता पूरी तरह नहीं मिल पाई है। जब महिलाएँ शिक्षित और जागरूक होंगी, तभी समाज और देश का वास्तविक विकास संभव हो पाएगा। इसलिए हम सभी को मिलकर महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और सशक्तिकरण के लिए कार्य करना चाहिए
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन
