बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल

शॉर्टकर्ट न अपनाएं, सफलता एक दिन में नहीं मिलती: शोभना नारायण

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झांसी| । बुंदेलखंड के झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के किले की तलहटी में चल रहे तीन दिवसीय बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) में लगातार साहित्य, कला और सिनेमा पर हो रही चर्चा में प्रख्यात नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण ने कहा कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकर्ट न अपनाएं यह एक दिन में नहीं मिलती।

बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल

पहले सत्र में काशी युगे युगे विषय पर साहित्यकार त्रिलोक नाथ पांडेयने कहा कि काशी का इतिहास बताते हुए कहा कि काशी की महिमा इतनी निराली है कि बुद्ध से लेकर मोदी तक काशी आए| उन्होंने सभी से काशी आने का आग्रह किया|।

इसके बाद सिविल सेवा अधिकारी और लेखक विवेक कुमार जैन की जेंडर इक्वालिटी, मेंटल हेल्थ पर लिखित पुस्तक ‘बचपन के पते पर’ के कवर का लोकार्पण हुआ।

दूसरे सत्र में कला का जीवंत संसार विषय पर स्कल्पचर आर्टिस्ट अभिषेक कुमार सिंह ने शिल्प कला के क्षेत्र में आने वाले युवाओं को मार्गदर्शन किया|।

तीसरे सत्र का विषय मनुष्य और मनुष्यता का प्रश्न: प्रशासक कवि और आध्यात्मिक मन का पक्ष रहा. इसमें विदेश मंत्रालय में निदेशक और लेखक नितिन प्रमोद ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद माता-पिता से उन्हें फोन देने की बजाय, संवाद करने और बाहर खेलने का आग्रह किया. शिक्षकों से छात्रों को रोचक अंदाज में पढ़ाने की बात कही| पत्रकार नीरज मिश्र ने महाकुंभ 2025 के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां के दतून बेचने वाले तक देश-दुनिया में लोकप्रिय हो गए|।

चौथे सत्र में ताल में रची साधना विषय पर प्रख्यात नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण ने सभागार में मौजूद छात्रों से मन का काम करने के लिए प्रेरित किया, साथ ही उनके माता-पिता से भी अपनी इच्छाएं बच्चों पर न थोपने का आग्रह किया. नृत्य में करियर बनाने वालों को सलाह देते हुए कहा कि आज आएं है तो कल नाम हो जाएगा. ऐसा नहीं होता. वक्त लगता है. शॉर्टकट अपनाने से फुलझड़ी से रोशनी ही दे पाएंगे|।

पांचवें सत्र में किस्से कहानियों से स्क्रीन तक विषय पर फिल्म निर्देशक तरुण डुडेजा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही किस्से, कहानियां सुनाने का शौक था. बाद में यही जीवन का हिस्सा बन गया उन्होंने कहा कि प्रमुख रूप से साधारण लोगों को असाधारण कहानियां पर्दे पर लाना उन्हें भाता है।

छठे सत्र में कंटेंट का क्राफ्ट, OTT का ड्राफ्ट विषय पर अभिनेत्री और फिल्म निर्माता निधि बिष्टने बताया कि कलाकार के रूप में हम बर्तन सरीखे हैं. जैसी किरदार की मांग होती है, वैसा ढल जाते हैं | उन्होंने कहा कि पैशन के लिए अंदर से आवाज़ आनी ज़रूरी है. इसके बाद अगर परिवार-समाज से लड़ना भी पड़ जाए तो लड़ो|।

सातवें सत्र का विषय प्रह्लाद चा के जीवन की पंचायत रहा| इसमें पंचायत सीरीज के प्रह्लाद चा यानी फैसल मलिक से ने कहा कि शुरुआती किरदार काफी छोटे मिले| मौका लपककर उन्हें निभाया. फैसल ने पुलिस वाले के रूप में विभिन्न सीरीज में अपने किरदारों पर कहा कि इस रोल से खुशी मिलती है इसलिए बार-बार करता हूं. वहीं, पंचायत सीरीज के अपने अनुभवों, अगले प्रोजेक्ट और पढ़ी जाने वाली किताबों पर भी चर्चा की|।

समापन कार्यक्रम में युग्म बैंड की संगीत प्रस्तुति से हुई| इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी कार्यक्रम में पहुंचे. जिन्होंने कार्यक्रम में मौजूदगी दर्ज कराने के साथ विभिन्न स्टॉल पर पुस्तकें, कैलीग्राफी पेंटिंग खरीदी और व्यंजनों का आनंद लिया|।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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