बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय

बीयू के ललित कला संस्थान में हुआ “कला आचार्य चित्र कला प्रदर्शनी- 2025” का शुभारंभ

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झांसी। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय (बीयू) के ललित कला संस्थान में दो दिवसीय “ कला आचार्य चित्र कला प्रदर्शनी – 2025 ” का शुभारंभ हुआ।

प्रदर्शनी ललित कला संस्थान एवं राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश लखनऊ की संयुक्त पहल से संपन्न हुई। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रोफेसर मुकेश पाण्डेय, अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. पुनीत बिसरिया, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग प्रो. मुन्ना तिवारी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफेसर मुकेश पाण्डेय ने  कहा —“कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, यह संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। शिक्षक जब कला का सृजन करते हैं, तो वे अपने विद्यार्थियों को केवल तकनीक नहीं सिखाते, बल्कि उन्हें सोचने, महसूस करने और अपनी पहचान खोजने की प्रक्रिया से जोड़ते हैं। ऐसी प्रदर्शनी यह सिद्ध करती है कि शिक्षण के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति भी निरंतर साधना और नवाचार की भावना से जुड़े रहते हैं। कला को जीवित रखने में ऐसे शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

इस अवसर पर अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. पुनीत बिसरिया ने कहा “शिक्षक समाज के सच्चे निर्माता होते हैं। जब शिक्षक स्वयं कला का अभ्यास करते हैं, तो वे विद्यार्थियों में अनुकरण की प्रेरणा भरते हैं। आज के समय में यह आवश्यक है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रह जाए, बल्कि उसमें संवेदनाओं और रचनात्मकता का समावेश हो। ‘कला आचार्य प्रदर्शनी’ इसी विचार को मूर्त रूप देती है।”

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मुख्य अतिथि, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा “कला वह साधना है जो व्यक्ति को अनुशासन और संयम सिखाती है। एक कला शिक्षक जब रचना करता है, तो उसके भीतर वर्षों का अनुभव, शिक्षा और निरीक्षण समाहित होता है। इस प्रदर्शनी की प्रत्येक कलाकृति अपने आप में एक कथा कहती है — एक शिक्षक के मनोविश्व की, उसके संघर्ष और समर्पण की।”

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संयोजक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने कहा “यह प्रदर्शनी उन सभी कला आचार्यों के लिए समर्पित है, जो अपने ज्ञान, संवेदना और सृजनशीलता से आने वाली पीढ़ियों के भीतर सौंदर्यबोध और अभिव्यक्ति की समझ विकसित करते हैं। शिक्षक केवल रंग और रेखाओं का ज्ञान नहीं देते, वे अपने विद्यार्थियों को जीवन के रंगों को समझने की दृष्टि प्रदान करते हैं।”

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पचास से अधिक कला शिक्षकों ने अपनी कलाकृतियाँ प्रस्तुत की हैं, जिनमें जलरंग, ऐक्रेलिक, मिश्र माध्यम, मूर्तिकला, रेखाचित्र तथा आधुनिक डिजिटल कला की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. अजय कुमार गुप्ता, डॉ. दिलीप कुमार और गजेंद्र सिंह ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि कार्यक्रम के संयोजन में भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। चयनित दस वॉलेंटियर्स ने भी प्रदर्शनी में सक्रिय योगदान दिया। प्रदर्शनी में झांसी, उरई, जालौन, राठ, हमीरपुर, कानपुर, कालपी और ललितपुर क्षेत्र के कला आचार्यों ने अपनी सहभागिता प्रदान की। विद्यार्थी सबत खाल्दी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया तथा कार्यक्रम का आभार डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने व्यक्त किया।

प्रदर्शनी के दौरान आगंतुकों में कला विद्यार्थियों, स्थानीय कलाकारों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सभी ने यह अनुभव साझा किया कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल कलाकारों को प्रोत्साहन देती है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी यह एक जीवंत शिक्षण मंच बन जाती है।

कार्यक्रम में डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. सोमा अनिल मिश्रा, डॉ. शिप्रा विशिष्ट, डॉ. प्रशांत मिश्र, डॉ. ऋतु शर्मा, डॉ. सुनीता, डॉ. रानी शर्मा, गोविंद यादव, डॉ. ब्रजेश, डॉ. संतोष तथा डॉ. संदीप वर्मा,श्वेता,डॉ.प्रमिला सिंह मालवीय,किरण बाबरिया आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

वैभव सिंह

बुंदेलखंड कनेक्शन

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