
यह अभियान विशेष रूप से लावारिस, गुमशुदा एवं जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिलाने तथा उन्हें उनके परिजनों या संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जाता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 से जनवरी 2026 तक अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इस अवधि में 18 वर्ष से कम आयु के कुल 192 बालकों तथा 124 बालिकाओं को रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों से सुरक्षित बचाकर चाइल्ड हेल्पलाइन एवं संबंधित प्राधिकरणों को सुपुर्द किया गया, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित दिशा मिल सकी। विशेष रूप से जुलाई 2025 एवं जनवरी 2026 में उल्लेखनीय संख्या में बच्चों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया, जो अभियान की सक्रियता एवं सतर्कता को दर्शाता है।
“नन्हें फरिश्ते” अभियान के अंतर्गत आरपीएफ के अधिकारी एवं जवान रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, ट्रेनों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखते हुए संदिग्ध परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही बच्चों की काउंसलिंग कर उनके अभिभावकों से संपर्क स्थापित किया जाता है एवं आवश्यकतानुसार उन्हें बाल कल्याण समिति को सुपुर्द किया जाता है।
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में संचालित यह अभियान न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि मानव तस्करी, बाल श्रम एवं अन्य सामाजिक जोखिमों की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रेलवे सुरक्षा बल, झांसी का यह मानवीय प्रयास समाज में जागरूकता फैलाने तथा जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित भविष्य प्रदान करने की दिशा में अत्यंत सराहनीय है।
रेलवे सुरक्षा बल ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी स्टेशन या ट्रेन में कोई बच्चा संदिग्ध या असहाय स्थिति में दिखाई दे, तो तत्काल आरपीएफ हेल्पलाइन 139 या निकटतम आरपीएफ पोस्ट को सूचित करें, ताकि समय रहते उनकी सहायता सुनिश्चित की जा सके।
