झांसी रेल मंडल

झांसी रेल मंडल विरासत संरक्षण करते हुए बढ़ रहा आधुनिकता की ओर

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झांसी ।उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में रेल परियोजनाओं में जहां एक ओर आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है वहीँ परियोजनाओं के बीच आने वाले ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को भी संरक्षित रखने का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है ।

इसी क्रम में आज धौलपुर–बीना तीसरी रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत जाखलौन–धौर्रा रेलवे स्टेशनों के मध्य चल रहे निर्माण कार्यों का सूक्ष्म एवं संरक्षा मानकों के अनुरूप निरीक्षण रेल संरक्षा आयुक्त प्रणजीव सक्सेना द्वारा किया गया।झांसी रेल मंडल

यह निरीक्षण न केवल परियोजना की गुणवत्ता और गति का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि रेलवे द्वारा विरासत संरक्षण और अत्याधुनिक तकनीक के संतुलित समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

निरीक्षण का उद्देश्य उक्त खंड में जहाजपुर – चांदपुर के पास स्थित प्राचीन धार्मिक और धरोहर स्थलों को बचाने हेतु रेलवे द्वारा इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीक का निरीक्षण रहा ।झांसी रेल मंडल

उक्त खंड में स्थित प्राचीन एवं आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों की संरचनात्मक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेलवे द्वारा स्मारक स्थल क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह विशेष तकनीक ट्रेनों के आवागमन से उत्पन्न होने वाले कम्पन को न्यूनतम स्तर पर नियंत्रित करती है, जिससे आसपास स्थित ऐतिहासिक धरोहरों की मूल संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह पहल भारतीय रेल की विकास यात्रा में आधुनिक अवसंरचना निर्माण के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

निरीक्षण के दौरान रेल संरक्षा आयुक्त ने कार्य की प्रगति, गुणवत्ता, सुरक्षा प्रावधानों तथा उपयोग की जा रही नवीन तकनीकों का विस्तार से अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को संरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) राजकुमार वानखेड़े, मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर नरेन्द्र सिंह सहित मुख्यालय एवं मंडल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह परियोजना पूर्ण होने पर क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता में वृद्धि, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार तथा यात्री एवं माल परिवहन की सुगमता सुनिश्चित करेगी। साथ ही यह विकास और विरासत संरक्षण के समन्वित मॉडल के रूप में भारतीय रेल की दूरदर्शी सोच को भी प्रतिबिंबित करती है।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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