इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्थापना, उसके गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत तथा शैक्षणिक उपलब्धियों को स्मरण किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ कृषि विज्ञान मंडपम में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसके बाद कृषि विज्ञान मंडपम में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्म विभूषण पुरस्कृत, पूर्व सचिव, डेयर एवं पूर्व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के डॉ. आर.एस. परोडा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिया गया नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, आधुनिक तकनीक, हाइब्रिड किस्मों, उर्वरकों, सहकारी संस्थाओं और किसानों के संगठन (एफपीओ) को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. परोडा ने कहा कि किसान आत्मनिर्भर होता है और वह अपने परिश्रम से समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।उन्होंने जैविक खेती, बायोफर्टिलाइजर, ड्रोन तकनीक, पॉलीहाउस खेती, एग्रोफॉरेस्ट्री तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि काफरी, झांसी के निदेशक डॉ. ए. अरुणाचल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय महत्व की संस्था है, जहाँ देश के 24 राज्यों के छात्र-छात्राएँ अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है तथा झांसी के साथ-साथ दतिया और मुरैना में भी इसका विस्तार हुआ है।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत 24 राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा अपने- अपने राज्यों की आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
इस अवसर पर विवि झांसी एवं दतिया महाविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष, विद्यार्थी तथा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
