अखिल भारतीय किसान मेला

आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएं किसान : ए के सिंह

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झांसी ।बुंदेलखंड के झांसी स्थित रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे तीन दियासीय किसान मेले के दूसरे दिन विश्वविद्यालय एवं दीनदयाल शोध संस्थान का संयुक्त सत्र संपन्न हुआ।

अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी–2026 के अंतर्गत आयोजित इस संयुक्त सत्र में कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में  किसानों से आह्वान किया कि वैज्ञानिक तकनीक, परंपरागत ज्ञान और संगठित प्रयासों के माध्यम से आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएं और विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करें।

अखिल भारतीय किसान मेला

यह मेला केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का सशक्त मंच है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि मेले में लगे सभी स्टॉलों का अवलोकन अवश्य करें—विश्वविद्यालय द्वारा प्रदर्शित उन्नत तकनीकों के साथ-साथ देश की विभिन्न संस्थाओं से आए नवाचारों को भी समझें और अपनाएँ। भारत की संस्कृति और परंपरागत ज्ञान हमारी सबसे बड़ी पूंजी है,इसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर ही कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है।

कुलपति ने किसानों को विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र भ्रमण के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि पॉलीहाउस में गोभी, टमाटर एवं खीरा की वैज्ञानिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, चना एवं सरसों की उन्नत खेती जैसे मॉडलों को देखकर सीखें और अपने खेतों में लागू करें।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारतवर्ष की कृषि परंपरा सदियों तक बिना रासायनिक खाद के समृद्ध रही है। हमारे परंपरागत ज्ञान और प्रकृति-आधारित खेती पद्धतियों को आज वैज्ञानिक मान्यता मिल रही है—यह हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रमाण है।

अखिल भारतीय किसान मेला

भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2026 को किसान महिला वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है—यह किसानों के सम्मान और कृषि के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नरेंद्र मोदी का विकसित भारत @2047 का संकल्प अवश्य साकार होगा।

दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष बसंत पंडित ने अपने संबोधन में कहा—“हर खेत पर मेड़ और हर मेड़ पर पेड़” ही समृद्धि का आधार है। केवल धान और गेहूँ से बुंदेलखंड का विकास संभव नहीं; किसानों को दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ना होगा।

भारतीय किसान संघ के डॉ. एस. के. दुबे ने किसानों से आह्वान किया कि किसान मेला से कम से कम एक नई तकनीक अवश्य अपनाकर जाएँ। परिवार को स्वस्थ रखने के लिए आधा एकड़ भूमि पर जैविक खेती और जैविक चारा उत्पादन शुरू करें।उन्होंने विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ उठाने पर बल देते हुए कहा—“मिट्टी स्वस्थ होगी तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा।”

अखिल भारतीय किसान मेला

इस अवसर पर पद्मश्री एवं अन्य पुरस्कार प्राप्त प्रगतिशील कृषकों— सेठपाल सिंह, कृष्णा यादव चंद्रशेखर सिंह, लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी, अवधेश प्रताप सिंह ‘लल्ला’, अशोक सिंह एवं कवल सिंह चौहान—ने अपने अनुभव साझा करते हुए नवाचार, परिश्रम और वैज्ञानिक मार्गदर्शन को सफलता की कुंजी बताया।

द्वितीय सत्र में हितधारकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ इसमें चारा फसलें, प्राकृतिक/जैविक खेती, दलहन, तिलहन, अनाज, सब्जियां, फल, कृषि वानिकी, बीजोत्पादन में अधिष्ठाता डॉ. आरके सिंह, सत्र प्रभारी डॉ. जितेन्द्र कुमार तिवारी, पूर्व निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह, डॉ. एके राय, डॉ. शिववेन्द्र सिंह, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. शुभा त्रिवेदी, डॉ. अर्तिका सिंह, डॉ. वीवी शर्मा, डॉ. रंजीत पाल डॉ. प्रभात तिवारी और डॉ. राकेश चौधरी ने हितधारकों को प्रशिक्षित किया।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

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