झांसी। विशेष न्यायाधीश अनु. जाति और अनु. जनजाति अनु.जाति (अत्याचार निवारण ) अधिनियम आदित्य चतुर्वेदी के न्यायालय ने दलित छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त कर दी और इस कारण दुष्कर्म के आरोपी को जेल से रिहाई नहीं मिल सकी।

विशेष लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह एवं कपिल करौलिया ने बताया कि वादी मुकदमा ने 24 फरवरी 2026 को थाना-नवाबाद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय से घर लौट रही थी। घर वापस आते समय नजा हास्पिटल वाली गली में केतन पटेल पुत्र जानकी प्रसाद निवासी सेरिया थाना टहरौली का कमरा है जो कि उनकी पुत्री को पहले से जानता था। उसने बहाने से उनकी बेटी को कमरे के अन्दर बुलाकर खींच लिया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। मेरी पुत्री के बार बार मना करने पर भी नहीं माना उसके साथ दुष्कर्म किया। वहां से जब वह किसी तरह घर पर आयी जो डरी सहमी और घबराई हुयी थी मेरे बार बार पूछने के बाद कुछ समय बाद पूरी बात बतायी।धारा-64 बी. एन. एस एवं धारा 3 (2) 5 एससीएसटी एक्ट में केतन पटेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
उक्त मामले में जेल में बंद आरोपी केतन पटेल की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई उपरांत पर्याप्त आधार नहीं पाते हुए न्यायालय ने प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
