झांसी।जिले में स्थित रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आज “विकसित कृषि–विकसित भारत @2047” विषय पर आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी–2026 का भव्य शुभारंभ करते हुए प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही इस संसथान को “बुंदेलखंड की तकदीर बदलने का केंद्र” बताया ।


समारोह में विशिष्ट अतिथि प्रो. रमेश चन्द, सदस्य नीति आयोग, झांसी -ललितपुर के सांसद अनुराग शर्मा, कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, पंकज त्रिपाठी, निदेशक कृषि, कृषि मंत्रालय उत्तर प्रदेश, डॉ. बी. के. बेहरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, तथा निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ सुशील कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्री शाही ने राष्ट्रीय महत्व की दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं—“श्री अन्न उत्कृष्टता केंद्र” एवं “जैविक और प्राकृतिक खेती उत्कृष्टता केंद्र” (कृषि उत्पाद परीक्षण प्रयोगशाला)—का लोकार्पण भी किया तथा वानिकी उत्पाद कार्यशाला की आधारशिला रखी।
कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि झांसी की यह वीरभूमि, जहाँ से रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर किया, आज विकसित भारत @2047 के संकल्प की नई चेतना जगा रही है। कृषि शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर सीधे किसानों के खेत तक पहुँचाना ही हमारी प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में भी अग्रणी,देश का लगभग 30% गेहूँ यहीं पैदा होता है।उन्होंने कहा कि फसल चक्र अपनाकर, बीज शोधन कर और नई तकनीकों से खेती करने पर ही आत्मनिर्भर भारत का 2047 का संकल्प पूर्ण होगा।
उन्होंने बुंदेलखंड में कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 200 एकड़ में विकसित मॉडल फार्म, हाई-टेक पॉलीहाउस, ग्रीष्मकालीन मक्का, चिया सीड्स, क्विनोआ के उत्पादन तथा नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान बुंदेलखंड की तकदीर बदलने का केंद्र है। किसानों से संगठित खेती, पशुपालन, दुग्ध, तिलहन, दलहन, मधुमक्खी व मत्स्य पालन को एकीकृत मॉडल के रूप में अपनाने का आह्वान किया।


