बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल 5.0

जनरल बिपिन रावत पार्क में सजेगा सहित्य और कला का साझा मंच

//

झांसी ।बुंदेलखंड की सांस्कृतिक चेतना, साहित्यिक परंपरा और समकालीन विमर्श को एक साझा मंच देने वाला बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल 5.0 यहाँ जनरल बिपिन रावत शहीद पार्क में 06 से 08 फरवरी के बीच आयोजित होने जा रहा है।

तीन दिवसीय यह आयोजन केवल साहित्य उत्सव नहीं बल्कि विचार, कला, लोकसंस्कृति, मीडिया, शिक्षा, सिनेमा और समाज के बहुआयामी संवाद का सशक्त मंच बनेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रख्यात साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद, पत्रकार, प्रशासनिक अधिकारी और युवा रचनाकार इस आयोजन में सहभाग करेंगे।

बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल 5.0

फेस्टिवल का शुभारंभ प्रथम दिन शुक्रवार को वैदिक और पौराणिक मंगलाचरण के साथ होगा, जिसे संस्कृत अध्येता और वैदिक ब्राह्मण आचार्य अंशुल नायक संपन्न कराएंगे। इसके बाद उद्घाटन सत्र में पद्मश्री से सम्मानित लोक गायिका और साहित्यकार मालिनी अवस्थी, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन प्रो बलराम पाणि, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय, झांसी मंडल के आयुक्त विमल कुमार दुबे और चर्चित पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध अपने विचार रखेंगे। उद्घाटन सत्र में बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, भाषा, लोककला और भविष्य की दिशा पर व्यापक संवाद होगा।

पहले दिन का पहला सत्र माटी की गूंज गीत गाथा और बुन्देलखण्ड विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें बुन्देली लोक गायिका साक्षी पटेरिया, आल्हा गायक जितेन्द्र चौरसिया और कवि विदित नारायण बुधौलिया लोकस्मृति और लोकध्वनियों को मंच पर जीवंत करेंगे। इसके बाद उच्च शिक्षा और विकसित भारत की परिकल्पना पर आधारित सत्र में प्रो बलराम पाणि और डॉ अनिरुद्ध रावत वैश्विक मंच पर भारत की शैक्षिक भूमिका पर विचार साझा करेंगे।

शाम के सत्रों में पुस्तक चन्दन किवाड पर चर्चा, मीडिया लोकतंत्र और मानव धर्म जैसे विषयों पर संवाद होगा। मालिनी अवस्थी और लेखक राहुल नील साहित्य और संगीत के रिश्ते पर बात करेंगे। वहीं ऋचा अनिरुद्ध और वरिष्ठ पत्रकार अरिंदम घोष मीडिया की भूमिका और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श करेंगे। दिन का समापन सिनेमा और डिजिटल कंटेंट से जुड़े सत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ होगा। गणेश वंदना, आल्हा पर वक्तव्य और बुन्देली लोक कला समिति द्वारा आल्हा गायन विशेष आकर्षण रहेगा।

दूसरे दिन शनिवार को काशी की ज्ञान परंपरा पर आधारित सत्र से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोक नाथ पाण्डेय, रामकथा मर्मज्ञ डॉ कुंदन कुमार यादव और लेखक वैभव मणि त्रिपाठी काशी की साहित्यिक और सांस्कृतिक यात्रा पर चर्चा करेंगे। इसके बाद कला के विभिन्न स्वरूपों पर केंद्रित सत्र में मूर्तिकार अभिषेक कुमार सिंह और वारली कलाकार आकांक्षा सिंह कला के जीवंत संसार को सामने रखेंगे।

दोपहर के सत्रों में भारत की विदेश नीति में धार्मिक पर्यटन की भूमिका, शास्त्रीय नृत्य की साधना और सिनेमा तक पहुंचती कहानियों पर संवाद होगा। विदेश मंत्रालय से जुड़े लेखक नितिन प्रमोद, वरिष्ठ पत्रकार नीरज मिश्र और सामाजिक कार्यकर्ता राहुल द्विवेदी धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर विचार रखेंगे। पद्मश्री शोभना नारायण कथक की साधना पर अपनी बात रखेंगी। फिल्म निर्देशक तरुण डुडेजा, कास्टिंग डायरेक्टर अनमोल आहूजा और शिक्षाविद मनीष जैसल सिनेमा की यात्रा पर अनुभव साझा करेंगे।

शाम के सत्रों में लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत के अभिनेता फैजल मलिक और प्रो मुन्ना कुमार पाण्डेय जीवन और अभिनय के अनुभव साझा करेंगे। कंटेंट और ओटीटी पर आधारित सत्र में अभिनेत्री और निर्माता निधि बिष्ट तथा लेखिका ज्योति वर्मा डिजिटल युग की रचनात्मक चुनौतियों पर बात करेंगी। दिन का समापन युग्म बैंड की लाइव संगीत प्रस्तुति से होगा।

तीसरे और अंतिम दिन रविवार को खेल, यात्रा, साहित्य और समाज से जुड़े सत्र आयोजित होंगे। अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित रचना गोविल, पूर्व क्रिकेटर और कोच अरविंद कपूर तथा शिक्षिका ऋचा यादव मैदान से मंच तक की यात्रा पर चर्चा करेंगे। इसके बाद लेखक राहुल नील, भारत की पहली महिला सोलो ट्रैवलर कायनात काजी और पत्रकार ऋतु भरद्वाज यात्रा और जीवन के अनुभव साझा करेंगे।

दोपहर के सत्रों में साहित्यिक चेतना, जनजातीय विमर्श और सामाजिक यथार्थ पर संवाद होगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और साहित्यकार सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, कवि दीपक मशाल और संपादक नितेश प्रसाद समकालीन साहित्य की भूमिका पर बात करेंगे। विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव अंजु रंजन और लेखक संदीप मुरारका जनजातीय समाज की पहचान और संघर्ष पर अपने विचार रखेंगे।

शाम के सत्रों में लेखक डॉ रहीस सिंह और रामकथा मर्मज्ञ राम मोहन शर्मा सामाजिक संवाद करेंगे। इसके बाद शौर्य चक्र से सम्मानित कर्नल सुकेश वर्मा युवाओं को प्रेरित करने वाला वक्तव्य देंगे। अभिनय और अस्तित्व विषय पर अभिनेता श्रीकांत वर्मा और रेडियो जॉकी शाहनवाज संवाद करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में पर्ल्स ऑफ बुन्देलखण्ड सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र की विशिष्ट प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। समापन समारोह के बाद प्रख्यात कत्थक नर्तक रवि प्रताप सिंह की प्रस्तुति और बैंड परफॉर्मेंस होगी।

आयोजकों के अनुसार बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल 5.0 का उद्देश्य क्षेत्रीय संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। यह आयोजन बुन्देलखण्ड की माटी से जुड़े विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव झांसी को एक बार फिर साहित्य और संस्कृति के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Previous Story

झांसी : एक लाख तीन सौ रूपए के साथ दो चोर गिरफ्तार

Next Story

समाजवादी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता होंगे सम्मानित

Latest from Jhansi