झांसी । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में महानगर के दीनदयाल नगर की अग्रसेन बस्ती में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने हिंदुओं को परिभाषित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति को बचाने के लिए सकल हिन्दू समाज को मिया-बीबी,वाइफ-हसबेंड व हब्बी और बब्बी की संस्कृति से बाहर निकल कर आना होगा।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के मुख्य वक्ता सुभाष जी के साथ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंडोखर सरकार के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज ने मातृ शक्ति को अपनी बेटियों को सहेलियां बनाने की अपील की ताकि वे लव जिहाद का शिकार न हों।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां भारती की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर व दीप प्रज्वलित कर किया। तो वहीं सरस्वती बालिका विद्या मंदिर दतिया गेट झाँसी की बहनों ने नुक्कड़ नाटक एवं देशभक्ति नृत्य प्रस्तुत किया तथा कमल सिंह चौहान बालिका विद्या मंदिर की बहनों द्वारा वीरांगना लक्ष्मीबाई नाटक की प्रस्तुति से सभी का मन मोहा। तत्पश्चात जुगनी सीरीज की भजन गायिका प्रियम श्रीवास्तव के द्वारा गायी गए भजन “धर्म सनातन उत्तम है डंके की चोट पर कहता हूँ”… ने पंडाल में शमा बाँध दिया।

मुख्य वक्ता क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने कहा कि कई बार कहा जाता है हिन्दू शब्द तो कहीं मिलता नहीं है। जो हिन्दुस्थात में जन्मा है वह हिन्दू है। हिन्द भूमि की हम संतान गीत भी सुनाया। जब फ्रांस में जन्मा फ्रांसिस और जर्मनी में जन्मा जर्मन कहलाता है इसलिए हिन्दुस्थान में जन्मा हिन्दू है। अटल जी ने कहा कि हमारे लिए भारत सामान्य भूमि का टुकड़ा नहीं है। हम इसकी संतान हैं इसलिए हम हिन्दू हैं। हम हिन्दू पुरखों की संतान हैं। उन्होंने औरंगजेब की क्रूरता और गुरु तेगबहादुर महाराज के त्याग की गाथा को सुनाया।

उन्होंने कहा था कि धर्म बचाने के लिए एक नहीं एक लाख बलिदान दिए जा सकते हैं। इसलिए उन्हें हिन्द की चादर कहा जाता है। छोटे बच्चों ने देश को बचाया इसलिए हम हिन्दू हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप और छावा फिल्म की कहानी सुनाई। डॉ. हेडगेवार जी गुरु जी और अन्य इस मार्ग पर क्यों चले क्योंकि पुरखों की विरासत के लिए लड़ना सीखो। पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे भूख लगना प्रकृति है। छीन कर खाना राक्षसी प्रवृति है और सभी में बांटकर खाना यही सनातन संस्कृति है। भारत के लक्ष्य चार है – धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो। सत्य बोलना धर्म,मिलकर रहना धर्म,पड़ोसी के साथ अच्छा व्यवहार करना धर्म है। सभी का सम्मान करना धर्म है। उन्होंने चारों चरणों की विस्तृत व्याख्या करते हुए धर्म और अधर्म को स्पष्ट किया।

मुख्य अतिथि पीठाधीश्वर पंडोखर सरकार धाम गुरुशरण महाराज ने कहा कि हम अपनी संस्कृति को भूल रहे हैं। हमें अपने बच्चों को श्रीरामचरितमानस का शाम के समय कम से कम 5 दोहे अवश्य पढ़ाएं। सुबह हनुमान चालीसा जरूर पढ़ें। विज्ञान के युग में अध्यात्म जरूरी। विज्ञान ही अध्यात्म है। हमारे पूर्वजों ने अपनी परंपराओं को संजो कर रखा। आज हमारी जिम्मेदारी है कि युवा अपने रिश्तों को जानें साथ ही सनातन संस्कृति की जानकारी रखें।
हिंदुत्व को बचाने के लिए इतिहास का अवलोकन करना होगा। आज हम कुछ कर पा रहे हैं तो संघ ही इसके पीछे है। सकल हिन्दू समाज के सहयोग से प्रभु श्रीराम अपने मंदिर में विराजमान हुए। आज सनातन संस्कृति के कारण ही प्रदेश में शांति है। विकास तो होता रहेगा,अपराध नियंत्रित रहना चाहिए। गौ माता की सेवा करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. अलका नायक प्राचार्या आर्य कन्या महाविद्यालय ने चिंता जताई कि आज युवा संस्कृति को जानने में कम रुचि रख रहे हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। अंत में कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभाग संघचालक शिव कुमार भार्गव, विभाग कार्यवाह धर्मेन्द्र, विभाग प्रचार प्रमुख मनोज टाटा, महानगर सह संघचालक जय सिंह सेंगर, महानगर कार्यवाह मुकुल पसतौर, महानगर प्रचारक सक्षम,आयुष आदि उपस्थिति रहे l
