झांसी।बुंदेलखंड के झांसी स्थित रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय एवं बागवानी अनुंसधान एवं विकास समिति उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में हो रहे चतुर्थ उद्यानिकी शिखर बैठक राष्ट्रीय सह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 के द्वितीय दिवस पर स्वदेशी एवं कम उपयोग की जाने वाली उद्यानिकी फसलों के सतत् विकास को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।


देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने फसल विविधीकरण, ऊर्ध्व खेती, स्मार्ट खेती, मृदा-रहित उत्पादन प्रणाली तथा नवाचार आधारित तकनीकों को किसानों की आय वृद्धि और क्षेत्रीय विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

दिनभर चली चर्चाओं में कटाई उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं कृषि-निर्यात की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने प्याज, लहसुन, ड्रैगन फ्रूट, आलू, सकरकंद, टमाटर, मिर्च एवं पुष्पोत्पादन, औषधीय पौधे से जुड़े प्रसंस्करण एवं विपणन अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकें किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने में सहायक होंगी। गुणवत्तायुक्त बीज, स्वच्छ रोपण सामग्री और उन्नत नर्सरी तकनीकों को उद्यानिकी विकास की मजबूत आधारशिला बताया गया।

संरक्षित खेती, सटीक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक, एक्वापोनिक्स, आईओटी आधारित बाग प्रबंधन तथा रोग एवं कीट प्रबंधन की उन्नत रणनीतियों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जलवायु-स्मार्ट फसलों, डिजिटल निर्णय-सहायक प्रणालियों, कृषि-वानिकी, हॉर्टी-पाश्चर एवं एकीकृत कृषि मॉडल को भविष्य की उद्यानिकी के लिए आवश्यक बताया गया। पोस्टर प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने अपने नवीन शोध कार्य प्रस्तुत किए।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. मनीष श्रीवास्तव, अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में उद्यानिकी नवाचार और स्मार्ट तकनीकें भविष्य की आवश्यकता हैं।
सायंकालीन सत्र में ऑस्ट्रेलिया, रूस, चिली, उज्बेकिस्तान, ईरान एवं अमेरिका सहित विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिससे सम्मेलन को वैश्विक आयाम प्राप्त हुआ।
